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देवर-भाभी

टॉवल से बाँधकर गले तक डाला लंड!

19 मिनट पढ़ें

BDMS Hindi Sex Stories : सविता भाभी को डॉगी बनाकर देवर ने चाटी गांड! हाथ टॉवल से बाँध 6 इंच लंड गले तक ठूँसा! मुंह चोदकर पिलाया पूरा माल! KamVasna से Chudai!

अभी तक आपने

"भाभी के दूध से भीगा लंड!"

में पढ़ा :-

अचानक लंड के बाल जोर से खींच लिए। “सविता, पागल है क्या तू?” वो हँसने लगीं। मैंने भी सिर के बाल खींचे। “उई माँ…” मुँह से और कुछ निकलने से पहले किस कर दिया। बहुत देर तक एक-दूसरे की जीभ चूसते रहे।

अब आगे :-

किस करते-करते चूत पर हाथ डाल दिया। पूरी गीली हो चुकी थी। कंट्रोल नहीं हुआ। एकदम दो उँगलियाँ अंदर सरका दीं।

“आआह्ह्ह… ओह्ह्ह अमेय… नहीं… नहीं… आह्ह… आह्ह… ओह्ह…”

उँगलियाँ अंदर-बाहर करता रहा। वो मजा लेती गईं। अब लंड भी हिलाने लगीं। मुँह से बही थूक पर ही लंड घिसतीं और गीला करतीं।

रात के साढ़े बारह बज चुके थे। जैसे रेस लग गई हो, कौन पहले झड़ेगा। चूत में उँगली करते-करते हाथ दुखने लगा, फिर भी हार नहीं मानी। अब तीन उँगलियाँ डालनी शुरू कीं।

आखिर कंट्रोल नहीं रहा। जोर-जोर से सिसकियाँ देने लगीं और पूरा मेरे हाथ के ऊपर झाड़ दिया।

मन ही मन खुश था। जीत मेरी हुई थी।

आँखें खोलीं। शर्मा गईं। “मैंने कहा था ना, तुम इंसान नहीं हो, तुम तो शैतान…”

बात पूरी होने से पहले उँगलियाँ उनके मुँह में ठूँस दीं। बस देखती रहीं। फिर बड़े चाव से चाट-चाटकर साफ कर दीं। फिर से जोर-जोर से किस शुरू किया। मुँह का स्वाद पूरा नमकीन लग रहा था।

किस के दौरान चूत के बाल हल्के-हल्के खिंच रहे थे। वो भी मजा ले रही थीं। पूरा थूक एक-दूसरे का चूस रहे थे।

थोड़ी देर ऐसा ही चला। फिर दोनों हाथ उनकी गांड पर ले गया। सहलाने लगा। मजा आने लगा था। गांड हिला-हिलाकर लेने लगीं। पकड़कर जोर से खींचता, छेद को स्ट्रेच करता, छोड़ता। उससे भी सिसकी देतीं।

गांड के होल में उँगली करने की इच्छा होने लगी। गांड इतनी बड़ी थी कि सामने से उँगलियाँ उधर पहुँच ही नहीं रही थीं। शायद प्रयास समझ गईं। मेरी तरफ देखा। लगा अब डाँटेंगी, हाथ हटाएँगी।

एकदम हँस पड़ीं। कान के पास आकर बोलीं, “अमेय, क्या हुआ? हाथ पहुँच नहीं पा रहा क्या, बच्चे का? इतनी बड़ी है क्या मेरी गांड?” जोर से हँसने लगीं।

लंड छोड़ा। थोड़ा पीछे हटीं। पूरा घूम गईं। मोटी गांड मेरी तरफ कर दी। साफ दिख रही थी। कमर पर काला धागा बँधा था। पूरी गांड पर स्ट्रेच मार्क्स थे, ऐसे एक जैसे जैसे किसी ने डिजाइन ही बना दिया हो।

देखते ही लंड उछल गया। थोड़ा आगे होते ही छह इंच मोटा लंड एकदम गांड पर लग गया।

पीछे मुड़कर देखा। हँसते हुए बोलीं, “शैतान कहीं के। उसको जरा लगाम लगा दे। वरना मेरी हालत बुरी कर देगा तुम्हारा हथियार।”

दोनों जोर से हँस पड़े।

“अमेय, अब ध्यान से देखो।”

इतना बोलकर डॉगी में झुक गईं। छाती जमीन पर टिका दी। घुटने फैलाकर गांड ऊपर कर दी। दोनों हाथों से गांड का छेद फैला दिया।

“अमेय, क्या तुम अब इसे देख पा रहे हो?”

आँखें फटी की फटी रह गईं। पहली बार था। जिंदगी में ऐसा कुछ पहली बार घट रहा था। छेद एकदम साफ दिख रहा था। बाजू में छोटे-छोटे बाल उगे थे। छेद को अंदर-बाहर कर रही थीं।

अद्भुत दृश्य था। छेद के ठीक नीचे चूत की रेखा थी। गांड फैलाने से योनि का थोड़ा भाग भी दिख रहा था।

पागल होने वाला था। लंड खड़ा तो था ही, ऊपर की धमनियाँ भी फूल गई थीं। देखता ही रह गया।

“हाँ सविता, देख तो पा रहा हूँ। पर कहीं पागल न हो जाऊँ, इसका डर है। कुछ सूझ नहीं रहा। आप ही बोलो, मैं क्या करूँ?”

हँसने लगीं। जैसे हरा दिया हो, मुट्ठी में कर लिया हो। “अम्म अमेय, क्या तुम इसे चाटना पसंद करोगे, या उँगली डालकर इसकी गर्मी महसूस करोगे? देखो, तुम्हारी मर्जी। जो चाहिए वो करो। आज ये पूरी सविता अमेय की है।” फिर हँसी।

उँगलियाँ तरस रही थीं। देर नहीं की। थोड़ी थूक हाथ पर लगाई और बीच वाली दो उँगलियाँ गांड में डाल दीं।

“आह्ह… ओह्ह… धीरे… धीरे…”

🔥 एक और कामुक स्टोरी : सोई हुई सुधा भाभी के मुंह में डाला लंड!

गरमाहट महसूस हो रही थी। छेद बहुत गर्म था। थोड़ी देर उँगली से अंदर-बाहर किया। गांड से भी पानी निकलने लगा। बस सिसकियाँ दे रही थीं। छेद बहुत टाइट और छोटा था।

“अमेय, धीरे करो। बहुत साल हो गए गांड चुदवाए। आदत छूट गई है। उस साले छेद को थोड़ा ढीला कर देना, फिर जो मर्जी कर लेना।”

“ठीक है सविता। जैसी तेरी मर्जी। रुक, इसे अभी ढीला करवाता हूँ।”

चखनी थी। वो वैसे ही हाथों से छेद फैलाए लेटी थीं। जरा भी देर नहीं की। गांड में जीभ डाल दी और चाटने लगा।

“ओह्ह… वाह… अमेय, ये तुम क्या कर रहे हो… ओह्ह… अह्ह… प्लीज ऐसे ही चाटते रहो… बहुत अच्छा लग रहा है अमेय…”

गांड इतनी बड़ी थी कि पूरा मुँह उसमें छुप रहा था। चाटते वक्त ध्यान गया, चूत और गांड से कोई बदबू नहीं आ रही थी। बल्कि एक तरह की खुशबू थी। शायद पियर्स या लक्स से नहाई थीं।

ऐसे ही उठकर नहीं आई थीं। पूरा शरीर साफ करके आई थीं, जैसे पता हो आज ये सब होने वाला है। इसलिए पूरे मजे दे रहा था।

खूब चूस रहा था। बीच में काटता, चूमता। पूरी गांड पर काटने के निशान पड़ गए। लाल हो चुकी थी। पागल हो गई थीं। जोर-जोर की आवाजें निकालती जा रही थीं।

बीच-बीच में चूत भी चूसता। चूत के छेद में जीभ डालकर गांड के होल तक घसीट लाता, छेद पर थूक देता, फिर चाटकर गांड में जीभ घुसाता। बस सिसकियाँ देती रह जातीं।

बहुत देर तक ऐसा चलने के बाद खुद को रोक नहीं पाईं। मेरे मुँह में झाड़ दिया। मुँह पूरा रस से भर गया। आज पहली बार किसी ने सविता की गांड इतनी देर चाटी थी।

“अमेय… मैं अब… ओह्ह… अह्ह… मेरी साँस… मैं थक गई बाबा… मैं थक गई।”

वैसे ही बिस्तर पर लेट गईं। साँस फूली हुई थी। आँखें बंद करके चुपचाप पड़ी रहीं। जोर-जोर से साँसें ले रही थीं।

ये Desi Sex Ki Hindi Sex Kahani आप गरमकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मुझे

फिर

से

अपना

लंड

चूसवाना

था।

पिछला

अधूरा

रह

गया

था।

उठा

और

चुपके

से

लंड

उनके

मुँह

के

सामने

रख

दिया।

“सुनो

सविता,

उठो

ना।

अब

थकने

का

टाइम

नहीं

है।

अभी

बहुत

कुछ

करना

है।

सब

मजा

क्या

तुम

ही

लोगी?

उठो।

अब

मेरी

बारी

है।”

सविता

पहले

से

मदहोश

थीं।

दोनों

का

शरीर

पसीने

से

लथपथ

था।

“हम्म्म…

जरा

सा

रुको।

मेरी

साँस

फूल

गई

है।

तुम्हें

तो

कुछ

होता

है

कि

नहीं।

अरे,

मैं

तो

भूल

ही

गई

थी।

मेरा

पाला

इंसान

से

कहाँ

पड़ा

है।

शैतान

ही

हो

तुम,

शैतान।”

आँखें

खोलीं।

आँखों

के

सामने

ही

लंड

रखा

था।

बड़ा

लंड

देखकर

एकदम

डर

के

उठ

गईं

और

जोर

से

हँसने

लगीं।

“तुम्हें

जरा

भी

रुकना

नहीं

आता

ना।

देख

रहे

हो

न,

क्या

हालत

की

है

तुमने

मेरी।”

पसीना

पोंछते

हुए

कहा।

सच

तो

ये

था

कि

मुँह

इतना

बड़ा

नहीं

था

कि

छह

इंच

का

पूरा

लंड

गले

तक

ले

सकें।

पर

आज

सुनने

वाला

नहीं

था।

गले

तक

पहुँचाना

था।

बैठे

देख

झट

खड़ा

हो

गया।

हँसते-हँसते

मुझे

ही

देख

रही

थीं।

“सविता,

चल

अब

घुटनों

पर

बैठ

जा।

देर

मत

कर।

मैं

नहीं

रुक

सकता।”

“अरे

हाँ

बाबा,

रुको

जरा।

मुझे

तैयार

तो

होने

दो।”

स्तन

सहलाते

और

गाल

में

हँसते

घुटनों

पर

आ

गईं।

“हाँ

लो

महाराज,

आ

गई

घुटनों

पर।

और

कुछ?”

दो

कदम

आगे

गया।

अब

छह

इंच

लंबा

और

करीब

दो

इंच

मोटा

लंड

ठीक

मुँह

के

सामने

था।

घूरने

लगीं।

समझ

नहीं

आ

रहा

था

इतना

बड़ा

पूरा

कैसे

लें।

चिंता

चेहरे

पर

साफ

थी।

“अमेय,

सुनो

ना।

तुम्हारा

लंड

बहुत

बड़ा

है,

और

मोटा

भी।

तू

ही

देख

ले

मेरा

मुँह

कितना

छोटा

है।”

मुँह

खोलकर

दिखाने

लगीं।

“समझ

ले,

मैं

तेरा

पति

हूँ।

और

यही

मेरी

इच्छा

है।

मुझे

और

कुछ

नहीं

सुनना।”

चेहरे

की

मुस्कान

कम

हो

गई।

अपने

आप

को

तैयार

कर

रही

थीं।

“ठीक

है

अमेय।

जैसा

तुम

कहो।

पर

सुनो,

धीरे

तो

कर

सकते

हो

ना।

मैं

जितना

हो

सके

उतना

बड़ा

मुँह

करती

हूँ।

तुम

बस

धीरे-धीरे

डालो।”

सिर्फ

गर्दन

हिलाई।

हाँ।

आँखें

बंद

कर

लीं।

दो

बार

थूक

गटकी।

जीभ

निकालकर

मुँह

खोलकर

बैठ

गईं।

जरा

भी

देर

नहीं

की।

झट

लंड

मुँह

में

सरका

दिया।

दोनों

हाथ

मेरी

जाँघों

पर

सटाए

और

पीछे

होने

लगीं।

गर्दन

पकड़ी

और

आधा

लंड

घुसेड़

दिया।

अब

उनके

पास

विकल्प

नहीं

था।

हाथ

जाँघों

से

हटाए

और

दोनों

हाथ

अपनी

गांड

पर

रख

दिए।

जितना

हो

सका

मुँह

बड़ा

किया।

आँखें

अभी

भी

नहीं

खोली

थीं।

आँख

से

पानी

निकलने

लगा।

परवाह

थी,

इसलिए

धीरे-धीरे

आगे-पीछे

हो

रहा

था।

जितना

ले

सकती

थीं

उतना

देता,

फिर

निकालता।

बीच-बीच

में

खुद

लंड

पकड़तीं

और

आगे-पीछे

होतीं।

कभी

पूरा

निकालकर

उस

पर

थूकतीं,

फिर

मुँह

में

लेकर

सारी

थूक

चाट

लेतीं।

कमरे

में

बस

गॉक,

गॉक,

पच,

पच,

सुप्प

की

आवाज

गूँज

रही

थी।

थूक

से

पूरा

लंड

गीला

हो

चुका

था।

नीचे

भी

टपक

रही

थी।

बहुत

देर

उनके

मुताबिक

अंदर-बाहर

किया।

अब

चार्ज

लेना

था।

लंड

मुँह

से

निकाला।

“सविता,

अब

तेरी

आँखें

खोल

और

मेरी

तरफ

देख।

सुन

रही

है

क्या?

मेरी

तरफ

देख।”

धीरे-धीरे

आँखें

खोलीं।

घूरने

लगीं।

चेहरे

पर

कोई

भाव

नहीं

था।

मुँह

से

थूक

टपक

रही

थी।

“अब

से

लंड

चूसते

वक्त

तू

सिर्फ

मुझे

देखेगी।

ना

बगल,

ना

नीचे,

और

ना

आँख

बंद

रहेगी।

और

हाँ,

लंड

को

हाथ

भी

नहीं

लगाएगी।

पूरा

वक्त

तेरे

हाथ

पीछे

बँधे

रहने

चाहिए।

मैं

अपने

हाथ

से

जैसा

चाहूँगा

वैसा

तेरा

सिर

हिलाऊँगा,

और

जितनी

देर

मुँह

में

रखना

चाहूँगा

उतनी

रखूँगा।

तुझे

बस

चूसना

होगा।

एक

बार

भी

हाथ

लगाया,

या

मुँह

से

बाहर

करने

की

कोशिश

की,

या

मुझे

धकेला,

तो

मुझसे

बुरा

आज

कोई

नहीं

होगा।

अब

तक

तूने

कहा

वैसा

किया।

अब

मेरी

बारी

है।

समझी?”

जानकर

गुस्से

में

बोला

था।

अगर

मना

करतीं

तो

रुक

जाता।

लेकिन

रिस्क

लेकर

देखना

था।

मालूम

था

गुस्से

से

डरेंगी।

पूरा

लंड

मुँह

में

डालकर

देखना

था।

मौका

अभी

था।

थोड़ी

डर

गईं।

चेहरे

पर

भाव

नहीं

थे।

झट

हाथ

पीछे

बाँध

दिए।

बहुत

भोली

थीं।

उनके

साथ

पहली

बार

ऐसा

कुछ

हो

रहा

होगा।

पति

ने

शायद

कभी

संतुष्ट

किया

नहीं।

अब

विधवा

भी

थीं।

प्यार

करने

वाला

मेरे

अलावा

कोई

नहीं

बचा,

ये

उन्हें

भी

मालूम

था।

मन

ही

मन

सब

कुछ

मान

चुकी

थीं।

“अमेय,

ठीक

है।

तुम

जो

बोलोगे

वैसा

करूँगी।

बस

तुम

गुस्सा

मत

करना।

और

जो

भी

करना,

ध्यान

से

करना।

तुम्हारा

लंड

बहुत

बड़ा

है।

मैंने

आज

तक

इतना

कभी

मुँह

के

अंदर

नहीं

लिया।”

“हाँ

सविता।

अगर

तुम

मुझे

खुश

रखोगी

तो

मैं

क्यों

गुस्सा

करूँगा।

तुम

बस

मैंने

कहा

उतना

करो।

मुझे

और

कुछ

नहीं

चाहिए।”

👉 ये कहानी भी जरूर पढ़ें : अँधेरे में बेटे ने फाड़ी पूर्णिमा माँ की चूत!

“ठीक

है

अमेय।

जाओ,

वो

वहाँ

पड़ा

टॉवल

है

ना,

वो

ले

आओ

इधर।”

कुछ

समझ

नहीं

आया।

कुर्सी

पर

पड़ा

टॉवल

उठाया

और

पास

आकर

खड़ा

हो

गया।

दोनों

हाथ

पीछे

किए।

“अब

बाँध

दे

मेरे

दोनों

हाथों

को।

इससे

मैं

चाहूँ

तो

भी

हाथ

बीच

में

नहीं

ला

पाऊँगी।

तब

तो

ठीक

है

ना।”

दिमाग

में

ये

आइडिया

आया

ही

नहीं

था।

सोचकर

ही

लंड

और

सख्त

हो

गया।

“सविता,

तेरा

दिमाग

कितना

बढ़िया

चलता

है।

ये

आइडिया

मैं

सोच

भी

नहीं

पाया।”

तारीफ

से

शर्माईं।

“हाँ

बस-बस।

सब

समझता

है

मुझे।

अब

तारीफ

तो

होगी

ही।

सब

मन

की

जो

हो

रही

है।”

दोनों

हँस

पड़े।

झट

उनके

दोनों

हाथ

टॉवल

से

कसकर

पीछे

बाँध

दिए।

चाहें

तो

भी

निकाल

नहीं

पाएँगी,

इतनी

खबरदारी

ली।

सामने

खड़ा

हो

गया।

रात

के

डेढ़

बज

चुके

थे।

लंड

और

बड़ा

हो

गया

था।

गले

में

उतरने

को

तरस

रहा

था।

वो

घूरे

जा

रही

थीं।

थोड़ी

डरी

थीं।

पहली

बार

पूरा

छह

इंच

मुँह

में

लेने

जा

रही

थीं।

“सविता,

जरा

भी

डरना

मत।

मैं

एकदम

धीरे

से

करूँगा।

तुझे

जरा

भी

तकलीफ

नहीं

होगी।”

हँसने

लगीं।

“ठीक

है,

मैं

तैयार

हूँ।

गले

तक

जाकर

रुकना

मत,

वरना

सब

खाना

बाहर

आ

जाएगा।

समझे?”

“सविता,

पहले

कभी

तूने

पूरा

लंड

मुँह

में

लिया

है

क्या?”

हँसते

हुए

बोलीं,

“मैं

शादीशुदा

थी

अमेय।

मेरे

पति

को

भी

पूरा

अंदर

देना

पसंद

था।

पर

वो

इंसान

था।

उसका

तेरे

जितना

बड़ा

नहीं

था,

शैतान

कहीं

के।

बहुत

ही

छोटा

था।

तीन

इंच

था

बस।

अंदर

लेते

ही

खत्म

हो

जाता

था।

तो

ज्यादा

दिक्कत

नहीं

होती

थी।”

“सविता,

तू

मुझे

पहले

ही

क्यों

नहीं

मिली?

तेरा

पति

तो

बिल्कुल

नाकारा

था।”

“अमेय,

तू

क्यों

अभी

इतने

सवाल

कर

रहा

है?

अब

मुझे

गुस्सा

मत

दिला

और

तरसा

भी

मत।

वरना

सब

कैंसल

कर

दूँगी।

फिर

बैठना

रोते।

अब

मेरे

मुँह

में

दे

दे

जल्दी।

मुझे

बस

चूसना

है

तेरा

लंड।

अब

कोई

सवाल

नहीं।”

हँसकर

बोला,

“ठीक

है

बाबा,

ये

ले।”

लंड

लेकर

चेहरे

के

पास

गया।

मुँह

खोल

दिया।

हल्के

से

गाल

पर

लंड

से

चार-पाँच

थप्पड़

लगाए।

एकदम

शर्मा

गईं

और

हँस

पड़ीं।

हवस

भरी

नजरों

से

देखने

लगीं।

मुँह

खोला

और

लंड

अंदर

लिया।

पहले

बस

टोपा

चूसने

लगीं।

जीभ

छेद

में

भी

डाल

रही

थीं।

लॉलीपॉप

की

तरह

चूस

रही

थीं।

कंट्रोल

नहीं

हो

रहा

था।

गर्दन

पकड़ी

और

झट

आधा

लंड

सरका

दिया।

“आआव्क…”

गले

का

सारा

थूक

लंड

पर

गिर

गया।

रुका

नहीं।

आगे-पीछे

जारी

रखा।

जैसा

कहा

था,

आँखें

सिर्फ

मुझ

पर

टिकी

थीं।

हल्के-हल्के

झटके

देने

लगा।

पूरी

रूम

गॉक-गॉक

से

गूँज

रही

थी।

सारे

बाल

इकट्ठा

करके

पकड़े।

बीच-बीच

में

खींचता

और

उसी

से

सिर

आगे-पीछे

कर

लंड

मुँह

में

धकेलता।

अब

पूरा

सरकाने

का

टाइम

आ

चुका

था।

रुक

गया।

आँखों

में

देखा।

हाँ

आँखों

से

झलक

रही

थी।

थोड़ा-थोड़ा

करके

सरकाना

शुरू

किया।

जीभ

लंड

के

नीचे

थी।

उ

सी

पर

घिसते-घिसते

गले

के

अंदर

जा

रहा

था।

थूक

की

वजह

से

आसानी

से

अंदर

ले

पा

रही

थीं।

आँखों

से

पानी

आने

लगा।

आँखें

लाल

होने

लगीं।

असहज

महसूस

कर

रही

थीं।

पर

रुकने

वाला

नहीं

था।

आधे

से

ज्यादा

ठूँस

दिया।

आह्ह,

अह्म्म

की

आवाज

निकलने

लगी।

शायद

उल्टी

जैसा

लग

रहा

हो।

फिर

भी

पूरा

लंड

मुँह

में

डाल

दिया।

गले

का

सब

कुछ

महसूस

हो

रहा

था।

“ओह्ह

सविता…

तुम

क्या

चीज

हो

यार…

तू

मेरा

पूरा

लंड

खा

गई

साली…

आह्ह्ह…

तू

लाजवाब

है

रे

सविता…”

इतना

कहते

ही

गले

से

एकदम

सारा

थूक

लंड

पर

गिरा

दिया।

पेट

तक

आया।

पूरा

लंड,

गोटियाँ,

सब

थूक

से

भर

गए।

कसकर

बाल

पकड़े

और

सिर

आगे-पीछे

करना

शुरू

किया।

आधा

बाहर

निकालता,

फिर

अंदर

डालता।

पंद्रह

मिनट

से

मुँह

में

लिए

बैठी

थीं।

आदत

हो

रही

थी।

अब

आसानी

से

पूरा

गले

तक

ले

रही

थीं

और

निकाल

रही

थीं।

पूरा

जाता

तो

आवाज

अलग

आती।

गवीक,

पच,

गवाईक,

पुच।

नाक

से

पानी

टपककर

लंड

पर

गिर

रहा

था।

कंट्रोल

छूट

रहा

था।

पूरे

मजे

से

चूस

रही

थीं।

पूरा

लेते

ही

गोटियों

को

जीभ

से

चाटतीं,

फिर

ऊपर

का

सारा

थूक

चूसकर

गटक

जातीं।

थूक

मुँह

से

बहकर

जाँघों

पर

चिपक

रही

थी।

पहली

बार

झड़ने

वाला

था।

“सविता,

क्या

तुम

तैयार

हो

मेरा

माल

मुँह

में

लेने

के

लिए?”

मुँह

में

लंड

होने

की

वजह

से

सिर्फ

“अम्म्म…

ह्म्म्म”

निकाला।

समझ

गया,

तैयार

हैं।

गर्दन

पकड़ी

और

जोर

से

आगे-पीछे

करने

लगा।

आँखों

से

पानी

और

ज्यादा

आ

रहा

था।

जैसे

रो

रही

हों,

या

खुशी

के

आँसू

हों।

पिछले

पंद्रह

मिनट

से

लंड

मुँह

से

निकाला

ही

नहीं

था।

साँस

बस

नाक

से

ले

रही

थीं।

सिर

जोर

से

पकड़ा।

और

जोर

से

आगे-पीछे

किया

और

चिल्लाया,

“सविता

भाभी,

अब

मैं

तुझे

अमर

करने

जा

रहा

हूँ…

ये

ले

अमृत,

पी

ले

सारा…

और

हो

जा

अमर।”

पूरा

लंड

गले

तक

सरकाया

और

वैसे

ही

ठहर

गया।

नाक

पेट

पर

लगी

थी।

जीभ

गोटियों

पर

थी।

पूरा

लंड

खा

लिया

था।

आँखें

बंद

कर

ली

थीं।

चेहरा

लाल

टमाटर

जैसा

हो

गया

था।

“ओह्ह…

आह्ह्ह…

सविता

मैं

झड़

गया…

ओह्ह…

ओह्ह…

आह्ह…

आह्ह्ह…”

गले

में

ही

पूरा

झाड़

दिया।

कुछ

देर

ऐसे

ही

रुका।

हिल

भी

नहीं

रही

थीं।

सिर्फ

नाक

से

जोरदार

साँसें

चल

रही

थीं।

धीरे-धीरे

लंड

बाहर

निकालने

लगा।

अभी

भी

गाढ़ा

वीर्य

बाहर

आ

रहा

था।

गले

में

झाड़ा

माल

पूरा

निगल

चुकी

थीं।

डर

था

कहीं

थूक

न

दें।

“सविता,

मुँह

खोल

अपना।

और

मुझे

दिखा

क्या

छुपा

रही

है।”

आँखें

खोलकर

मेरी

तरफ

देखा।

आँखें

लाल

हो

रखी

थीं।

गर्दन

ऊपर

करके

मुँह

खोला।

वीर्य

मेयोनीज

की

तरह

गाढ़ा

था।

पूरा

मुँह

भरा

था।

“ये

तुझे

पूरा

पीना

ही

पड़ेगा

सविता।

थूकना

नहीं

है।”

बेचारी

कुछ

बोल

ही

नहीं

पा

रही

थीं।

हाथ

बँधे

थे।

सामने

मैं

और

मेरा

लंड।

चारा

नहीं

था।

एकदम

शर्मा

गईं।

मुँह

बंद

किया,

आँखें

नीचे

करके

सारा

माल

गटक

लिया।

फिर

आँखों

में

आँखें

डालकर

देखने

लगीं।

“देखो,

कुछ

बचा

हो

तो

बोल

मुझे।”

मुँह

खोला

और

जीभ

बाहर

निकालकर

दिखाने

लगीं।

हैरान

था।

ये

अंदाज

बेहद

पसंद

आया।

“सविता,

तू

सबसे

अलग

है।

अब

तू

सिर्फ

मेरी

है।

सिर्फ

मेरी।”

बाँहों

में

ले

लिया।

💋 आपको ये कहानी पसंद आएगी : किचन में शर्त जीतकर फाड़ी चूत! - चटाई वाली भाभी!

सुनते

ही

शर्मा

गईं।

हाथ

बँधे

ही

थे।

कसकर

बाँहों

में

लिया।

किस

करने

की

इच्छा

हो

रही

थी।

उन्हें

अंदाजा

नहीं

था।

एकदम

किस

करना

शुरू

किया।

हैरान

थीं।

आँखें

खुली

की

खुली

रह

गईं।

मुँह

में

इधर-उधर

थोड़ा

वीर्य

बचा

था।

एकदम

दूर

किया।

“तुम

पागल

हो

चुके

हो

पूरे।

मुझे

मुँह

तो

धोने

दो।

फिर

जो

चाहे

कर

लेना।”

“सविता,

मुझे

तुम्हें

ऐसे

ही

चूमना

है।

बस।

मुझे

और

कुछ

नहीं

सुनना।”

आगे

कुछ

बोल

नहीं

पाईं।

गाल

में

हँसते-हँसते

देखने

लगीं।

बाल

बिखरे

थे।

चेहरा

लाल।

माथे

का

कुमकुम

और

आँखों

का

काजल

फैला

था।

होंठों

से

थूक

और

वीर्य

जरा

सा

बाहर

आ

गया

था।

साँस

फूलने

से

स्तन

जोर

से

ऊपर-नीचे

हो

रहे

थे।

हाथ

अभी

भी

पीछे

बँधे

थे।

चूत

पूरी

गीली

थी।

पानी

जाँघों

से

घुटनों

तक

आ

चुका

था।

टाँगें

हल्की

काँप

रही

थीं।

पास

गया।

उठाकर

खड़ा

किया।

बाँहों

में

लिया।

फिर

से

चूमने

लगा।

लंड

चूसने

के

बाद

चुम्बन

में

उन्हें

भी

मजा

आ

रहा

था।

बाहर

आया

सारा

वीर्य

और

थूक

चाट

ली

थी।

पहली

बार

अपना

वीर्य

चखा

था।

थूक

की

मिलावट

से

और

स्वादिष्ट

लग

रहा

था।

करीब

दस

मिनट

लगातार

किस

किया।

हाथ

बँधे

ही

रहने

दिए।

उसी

दौरान

लंड

फिर

से

खड़ा

हो

गया।

पेट

पर

चुभने

लगा।

जानकर

टाँगें

उठातीं

और

लंड

मसलतीं,

जाँघों

से

सहलातीं।

बीच-बीच

में

चूत

में

उँगली

डालता।

कभी

चुचे

जोर

से

दबाता,

चूसता।

लगातार

सिसकियाँ

लेती

रहीं।

पूरा

सुख

मिल

रहा

था।

उन

पंद्रह

मिनट

में

बातें

नहीं

हुईं।

उसी

दौरान

दो

बार

मेरे

हाथों

पर

झड़

गईं।

हाथ

पूरा

गीला

और

चिपचिपा

हो

चुका

था।

अब

प्यार

भरी

नजर

से

देख

रही

थीं।

कामुक

नजर

घायल

किए

जा

रही

थी।

चूत

में

डाली

वही

उँगलियाँ

उनके

मुँह

में

भी

डाल

देता।

बड़े

चाव

से

चूसतीं।

फिर

उसी

जीभ

से

किस

करतीं।

चूत

का

नमकीन-मीठा

स्वाद

भी

आ

रहा

था।

रात

के

दो

बजकर

पंद्रह

मिनट

हो

रहे

थे।

दोनों

पसीने

से

लथपथ।

एसी

चालू

था,

पर

शरीर

गरम

थे।

अब

असली

सुख

देने

वाला

था।

चूत

में

लंड

घुसाकर

सवारी

करवानी

थी।

आँखें

बंद

थीं।

खोलने

के

लिए

शरारत

करनी

थी।

सीधे

चुची

पकड़ी

और

जोर

से

दबा

दिया।

एकदम

चिल्ला

उठीं।

आँखें

खोलकर

देखने

लगीं।

चुची

दबाने

से

दूध

की

धार

एकदम

चेहरे

पर

गिरी।

“अमेय,

इतनी

जोर

से

कौन

दबाता

है।

दुखता

है

वो।

दर्द

होता

है

मुझे।”

स्तन

सहलाने

लगीं।

“इतना

दर्द

हुआ

तुझे?

सॉरी

सविता।

ले,

तू

भी

दबा

दे

मेरा।”

लंड

आगे

किया।

थोड़ा

चिढ़

गई

थीं।

“पहले

तो

मेरे

हाथ

खोल

दे।

जल्दी

से।

सब

तेरी

मनमानी

चल

रही

है

यहाँ

पर।”

“सविता,

गुस्सा

मत

कर।

रुक,

खोलता

हूँ।”

बंधे

हाथ

खोल

दिए।

दोनों

हाथों

को

थोड़ा

सहलाया।

मुझे

देखने

लगीं।

झट

पास

लिया।

कान

में

बोला,

“सविता,

अब

मैं

तेरे

चूत

में

लंड

घुसाने

वाला

हूँ।

तू

तैयार

हो

जा।

मुझे

अब

कंट्रोल

नहीं

हो

रहा।”

दोनों

एक-दूसरे

के

साथ

सहज

हो

चुके

थे।

बिना

लाज

सब

बोल

रहे

थे।

बिना

शरमाए

अंगों

के

नाम

लेकर

गंदी

बातें

कर

रही

थीं।

जो

चाहिए

बेझिझक

बता

रहे

थे।

बस

देखने

लगीं।

गुस्सा

था।

पर

चूत

के

अंदर

लंड

लेना

भी

था।

तरस

रही

थीं।

ऐसे

बोलने

से

गुस्सा

गायब

हो

गया।

गाल

में

मुस्कुराईं

और

हँसने

लगीं।

समझ

गया,

अब

मजा

लेना

चाहती

हैं।

“हाँ

क्या।

पहले

तेरे

लंड

को

तो

तैयार

कर

ले।

फिर

आ

जाना

डालने।

शैतान

कहीं

के।”

झट

लंड

कसकर

पकड़ा

और

हिलाने

लगीं।

इस

बार

पकड़

ज्यादा

मजबूत

थी।

“सविता,

धीरे-धीरे…

अह्ह…

ओह्ह…”

थोड़ा

शर्माईं।

“इस

शैतान

को

अगर

जल्दी

खड़ा

करवाना

हो

तो

ऐसे

ही

करना

पड़ेगा

अमेय।”

जोर

से

हँसने

लगीं।

“सविता,

मेरे

लंड

को

थोड़ा

गीला

कर

दे

ना।

तभी

वो

तेरे

चूत

में

आराम

से

जा

पाएगा।”

मेरी

तरफ

देखकर

शर्माईं।

“हाँ-हाँ,

लेती

हूँ

मुँह

में।

रुक

जरा।”

आगे की कहानी :

'

हाथ बाँधके फाड़ी भाभी की टाइट चुत!

'

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यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। इसमें दिखाए गए पात्र और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं। साइट केवल 18 वर्ष या अधिक आयु के पाठकों के लिए है।

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