realXstories
देवर-भाभी

बाथरूम में नंगी भाभी को पिलाया अपना माल!

10 मिनट पढ़ें

Kamvasna Sex Story in Hindi : बाथरूम में नंगी भाभी को मूतते देख देवर ने जबरदस्ती चाटा चूत! फिर Wild तरीके से मुँह में लंड देकर चोदा! और मुंह झाड़ा अपना वीर्य!

अभी तक

"घोड़ी बनाकर फिरसे फाड़ी सविता की चूत!"

में आपने पढ़ा :-

“उईईईई

माँ…

अमेय…

नहीं…

नहीं…

अरे

मर

गई

रे…

आह…

अह्ह…

ओह्ह…

ओह्ह…

ओह्ह…”

पूरा

चूत

में

झाड़

दिया।

झड़ने

तक

स्तनों

को

ऐसा

पकड़कर

रखा

जैसे

कोई

स्पंज

बॉल

हो।

चिल्लाए

ही

जा

रही

थीं।

सारा

माल

धीरे-धीरे

चूत

में

उतर

रहा

था।

पूरा

माल

उतारने

के

बाद

लंड

बाहर

निकाला।

बिस्तर

पर

ही

गिर

गईं।

साँस

फूल

गई

थी।

जोर-जोर

से

साँस

ले

रही

थीं।

कुछ

सूझ

नहीं

रहा

था।

पसीने

से

लथपथ

दोनों

एक-दूसरे

को

देख

रहे

थे।

पूरे

बदन

से

पसीना

टपककर

बिस्तर

पर

गिर

रहा

था।

उनकी

तरफ

देखा।

पैर

फैलाए

मेरी

तरफ

देखती

पड़ी

थीं।

नजर

चूत

पर

गई।

धीरे-धीरे

माल

बाहर

निकल

रहा

था।

साँवली

चूत

पर

दही

जम

चुका

था।

किसी

पहाड़

से

सफेद

पानी

का

झरना

बह

रहा

हो,

ऐसा

दृश्य

था।

वहीं

डाली

चादर

उठाई

और

चूत

साफ

कर

ली।

घड़ी

में

पाँच

बज

चुके

थे।

बाहर

बारिश

चालू

हो

गई

थी।

मौसम

ठंडा

पड़

गया

था।

घर

में

एसी

चलने

की

वजह

से

ठंड

ज्यादा

ही

पड़

गई

थी।

झट

पास

जाकर

बाँहों

में

लिया।

उन्होंने

भी

जकड़

लिया।

अब

एक-दूसरे

की

बाँहों

में

लिपटकर

लेटे

थे।

नंगे

होने

की

वजह

से

शरीर

की

गरमाहट

मिल

रही

थी।

आँखें

बंद

कर

ली

थीं।

मैं

सिर्फ

चेहरा

देखे

जा

रहा

था।

चेहरा

साँवला

था।

घर-घर

चटाई

बेचती

थीं,

धूप

में

चलना

पड़ता

था।

अंदर

का

शरीर,

स्तन,

नाभि

और

गांड,

थोड़े

गोरे

थे।

चेहरा

साँवला

होने

के

बावजूद

आकर्षक

था।

सुंदर

और

मनमोहक।

फिगर

की

वजह

से

और

मादक

दिखतीं।

आँखों

में

भर

रहा

था।

अब आगे :-

अचानक आँखें खुल गईं। मैं उन्हें ही घूरे जा रहा था। समझ आ गया।

शर्माईं। “अमेय, क्या देख रहे हो तुम ऐसे?”

“तुम्हारी खूबसूरती।”

और ज्यादा शर्माईं। “तुम भी ना अमेय। अब मुझे लज्जा आ रही है।” मुँह बदन पर लाकर छुपा लिया।

“अरे-अरे, इसमें शर्माने की क्या बात। मैं तो सच ही बोल रहा हूँ।

🔥 एक और कामुक स्टोरी : घोड़ी बनाकर फिरसे फाड़ी सविता की चूत!

मैंने आज तक तेरे जितनी सुंदर और सुडौल औरत नहीं देखी। तेरा चेहरा, तेरा कटीला और भरा बदन, इतनी बड़ी गांड, चिकनी चूत। आहाहा… और सब कुछ स्वाद में भी बढ़िया। वाह।”

मेरी तरफ देखने लगीं। “हाँ, आ गए लाइन पर वापस। मैंने छाती और कुल्हे इलावा कुछ दिखता भी है तुम्हें? जब देखो, लगे ही रहते हो।”

“हाँ तो तूने इतने बड़े करवाए हैं कि उसके आगे का कुछ दिख ही नहीं पाता ना।” हँसने लगा।

वो भी जोर से हँसने लगीं। “शरारती कहीं के।”

इतना बोलकर चूमना शुरू किया। मस्त दस-पंद्रह मिनट तक एक-दूसरे की थूक पीते रहे और जबान चूसते रहे। धीरे-धीरे लंड बड़ा होने लगा। एकदम सलामी दे दी। जाँघों को चुभने लगा।

लंड पर मारा। जबान चूसना छोड़कर हँसने लगीं।

“तुम्हारा तो थक ही नहीं रहा है अमेय। हाए राम, क्या होगा मेरा आज।”

बाँहों से उठ गईं और बिस्तर पर बैठ गईं। मैं भी बगल बैठ गया।

“कुछ भी नहीं होगा सविता। मैं शर्त जीत जाऊँगा और तुम कल से सिर्फ मेरी हो जाओगी।”

ये सुनकर गाल-ही-गाल में शर्मा गईं। एकदम उठ गईं।

“क्या हुआ सविता, रुक ना। क्यों उठ गई?” मैं भी साथ उठ गया।

“अरे, मुझे बाथरूम जाना है। उसको भी नहीं जाऊँ क्या। पागल।”

दोनों हँसने लगे।

“हाँ सविता, जाओ-जाओ। मैंने कहाँ रोका है।”

बाथरूम की तरफ जाने लगीं। लाइट वगैरह दिखाने मैं भी पीछे-पीछे चला। चलते वक्त कुल्हे बहुत अच्छे से ऊपर-नीचे हो रहे थे। कमर तक आए बाल उड़ रहे थे। पीछे से बहुत मादक दिख रही थीं।

बाथरूम तक पहुँच गईं। झट पास जाकर लाइट चालू करके दे दी। अंदर गईं। जैसे ही दरवाजा बंद करतीं, दरवाजा पकड़ लिया।

“अमेय, ये कैसा मजाक है। जल्दी से दरवाजा छोड़ो। मुझे बड़ी जोर की आई है।”

दरवाजा पीछे किया और सामने जाकर खड़ा हो गया।

“ये दरवाजा बंद नहीं होगा सविता। मुझे तुझे ऐसे देखना है।”

ये Antarvasna Family Hindi Sex Stories आप गरमकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

चौंक गईं। “क्या? तुम क्या बोल रहे हो अमेय। तुम्हें समझ भी आ रहा है क्या?” हँसने लगीं।

अंदर चला गया। “हाँ सविता। सच में मुझे देखना है तुझे। प्लीज तुम करो ना। मैं बस देखूँगा, यहाँ पर खड़े-खड़े।”

गाल में हँसने लगीं। “नहीं हाँ अमेय। ये क्या पागलपन है। तुम जाओ बाहर, जल्दी।”

“अरे सविता, आज मेरे अंग पर, मेरे मुँह में, बल्कि मेरे बिस्तर पर भी मूता है। और वो सब मैंने अपनी खुली आँखों से देखा है। तो अभी क्या प्रॉब्लम है।”

“वो और ये दोनों अलग-अलग होता है अमेय। तुम जाओ ना।”

👉 ये कहानी भी जरूर पढ़ें : अँधेरे में बेटे ने फाड़ी पूर्णिमा माँ की चूत!

वहीं डटा रहा। बड़ी जोर से मूत आया था। कंट्रोल नहीं पा रही थीं। छाती पर धक्का दिया।

“ठीक है। कर ले जो करना है। देख ले। और सूँघते रहना सारी दुर्गंध। यहाँ से हिले तो देखना अब।”

पंजों पर नीचे बैठ गईं। मुँह मेरी ही तरफ था। टाँगें फैलाईं। एक हाथ से चूत सहलाकर दो उँगलियों से मूत्रद्वार खोला। अब मेरी तरफ देखने लगीं। मैं चूत को ही घूरे जा रहा था।

शु-शु जैसी आवाज आई और चूत से मूत बाहर गिरने लगा। रंग हल्का पीला और सफेद था। मूतते हुए मेरी तरफ देखे जा रही थीं। आँखों में लाज साफ-साफ दिखाई दे रही थी।

आँखों में देखता और फिर चूत पर नजर गड़ाए रखता।

लंबी धार के बाद पानी आना रुक गया। थोड़ा और जोर लगाने के बाद और थोड़ा पानी बाहर आया। रुक गया।

मूत हो चुका था। सारा पानी बाथरूम के फर्श पर था। ज्यादा नहीं, पर थोड़ी सी गंध आ रही थी। उठकर खड़ी हो गईं। पानी डालकर मूत साफ कर दिया।

मेरी तरफ मुड़ीं। “हो गई तसल्ली। पड़ गई कलेजे में ठंडक।”

कुछ नहीं बोला। आँखों में देखते-देखते पास गया। नीचे बैठ गया। झट जाँघ पकड़कर एक टाँग उठाई। एकदम दीवार का सहारा लिया और दीवार से सटकर खड़ी हो गईं।

कुछ समझतीं, तब तक जबान चूत में डाल दी। बड़ी जोर की सिसकी दी और बाल पकड़ लिए। चूत चाटने लगा। थोड़ा मूत अभी भी वहीं मौजूद था। पूरे चूत का स्वाद नमकीन ही नमकीन लग रहा था।

रुका नहीं। और जोर-जोर से जबान से चाटने लगा। सिसकियाँ दिए जा रही थीं।

“ओह्ह अमेय… ये तुम क्या कर रहे हो… ओह्ह… ओह्ह… तुमने बचा सारा मूत पी लिया मेरा… ओह्ह… अह्ह… चाटो और जोर से चूसो मेरी चूत को… कर दो मेरी चूत को साफ… एक बूँद भी मत छोड़ना मूत की… आह… ओह्ह… ओह्ह… ओह्ह…”

ये Kamvasna वाली XXX Chudai Ki Kahani आप गरमकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

सिर पकड़ा और चूत पर दबाने लगीं। जबान अंदर गाड़ दी और अंदर ही घुमाने लगा। बहुत अच्छा लगा। पागल होने लगीं। सिसकियाँ बढ़ने लगीं। जोर-जोर से, “ओह्ह अमेय… ओह्ह… और चूसो… और चूसो… आह… आह… ओह्ह…” यही कहने लगीं।

एकदम मेरे मुँह में झड़ गईं। सारा पानी चेहरे पर और मुँह के अंदर था। साँसें तेज थीं। आँखें बंद कर दीवार टिके खड़ी थीं। बदन जोर-जोर से ऊपर-नीचे हो रहा था।

उठाई हुई टाँग हल्के से नीचे रख दी। उठकर खड़ा हो गया। आँखें खोलीं। मेरी तरफ देखकर बोलीं, “तुम सच में पागल हो अमेय। और तुम्हारे साथ तुम मुझे भी पागल कर दोगे।”

इतना बोलकर चूमना शुरू कर दिया। मुँह पर गिरा सारा पानी चाट लिया। जबान चूसने लगीं। चूत का सारा नमकीन पानी दोनों ने मिलकर गटक लिया था।

लंड ने उभार ले लिया। बीच में खड़ा लंड पेट पर चुभ रहा था। समझ गई थीं, सख्त हो गया है। बिना बोले हाथ रखा और सहलाने लगीं। जोर-जोर से हिलाने लगीं।

जगह बदल गई। अब मैं दीवार से सटा खड़ा था। सविता सामने। धीरे-धीरे चाटते नीचे बैठ गईं और लंड मुँह में ले लिया। मुँह से बस आवाजें निकल रही थीं।

पूरा अंदर तक लेकर बाहर निकाल रही थीं और फिर से मुँह के अंदर ले रही थीं। लंड थूक से भरा पड़ा था। जब भी बाहर निकालतीं, थूक की एक तार बनती। मुँह से होकर टोपे तक जुड़ी हुई।

“सुप्प-सुप्प” करके वापस मुँह में खींचतीं और फिर से चूसने लगतीं।

छह इंच से डर खत्म हो चुका था। आसानी से गले तक लेतीं। बाहर निकालतीं। जमा हुआ थूक लंड पर थूकतीं। हाथ से पूरे लंड पर फैलातीं और वापस झट मुँह में लेकर सारा थूक गटक जातीं। अब इस काम में माहिर बन चुकी थीं।

रुकने का नाम ही नहीं ले रही थीं।

“सविता… चूस… ऐसे ही चूस… ओह्ह… आह… आह… चुसती रह मेरी जान… ओह्ह… ओह्ह…”

💋 आपको ये कहानी पसंद आएगी : नौकर ने फाड़ी जेठानी की प्यासी चुत!

थोड़ी ही देर बाद खुद को रोक नहीं पाया। सारा वीर्य मुँह में छोड़ दिया। आखिरी बूँद निकलने तक लंड मुँह में पकड़े रहीं। सारा वीर्य मुँह में इकट्ठा कर रही थीं।

दोनों हाथों से सिर पकड़कर रखा था, ताकि बाहर ना निकाल पाएँ। पर उन्होंने ही जोर से मुँह में जकड़ रखा था। वीर्यपान करना पसंद आ रहा था।

पूरा झड़ जाने के बाद मुँह से निकाला। बड़े कामुक नजर से देखे जा रही थीं। मुँह में सारा वीर्य पकड़ रखा था। अभी गटका नहीं था। इसी वजह से मुँह फूल गया था।

घुटनों पर थीं। नजर मेरी तरफ। होंठ ठीक लंड के सामने।

“सविता, जरा दिखा तो मुझे। तूने क्या अपने मुँह में छिपा रखा है।”

धीरे से मुँह खोलकर दिखाया। एकदम गाढ़ा, ताजा वीर्य मुँह में भरा था। जमकर लस्सी पी हो और वही मुँह में रखकर दिखा रही हों, ऐसा लग रहा था।

“अब किसका इंतजार है तुम्हें सविता। गटक ले मेरा माल और उसके बाद ही मुँह खोलना।”

वैसे ही किया। एक ही बार में सारा वीर्य गटक गईं।

“देख ले अमेय। कुछ बाकी तो नहीं रहा ना?” मुँह खोला। जबान बाहर निकाली और दिखाने लगीं।

नंगी सविता बड़ी कामुक दिखाई दे रही थीं। कुछ नहीं बोला। उठाया और कसकर पकड़े किस करने लगा। वो भी बड़े मजे से किस करने लगीं।

ये Desi Sex Ki Hindi Sex Kahani आप गरमकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

थोड़ी

देर

दोनों

एक-दूसरे

को

खूब

चूसते

रहे।

हमारे

गाँव

में

सुबह

साढ़े

छह

बजे

सायरन

बजती

है।

किस

लिए

बजती

है,

नहीं

मालूम।

पर

हर

रोज

सुबह

छह

और

रात

साढ़े

आठ

बजे

वो

सायरन

बजती

थी।

एक-दूसरे

को

चूसे

ही

जा

रहे

थे

कि

साढ़े

छह

के

सायरन

से

होश

आया।

नंगे

बाथरूम

में

लगभग

एक

घंटे

से

सेक्स

कर

रहे

थे।

सविता

मेरी

तरफ

देखकर

बस

हँस

रही

थीं।

“अमेय,

चलो

बाहर

अब।

बस

हो

गया

यहाँ।”

आगे की कहानी :

"किचन में शर्त जीतकर फाड़ी चूत!"

शेयर करें:WhatsAppTelegram

यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। इसमें दिखाए गए पात्र और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं। साइट केवल 18 वर्ष या अधिक आयु के पाठकों के लिए है।

इसी श्रेणी की कहानियाँ

सभी देखें
देवर-भाभी

सोई हुई सुधा भाभी के मुंह में डाला लंड!

Antaravasna Sex : सर दर्द होती भाभी की करी मालिश! नींद में नाइटी के अंदर से दबाए चूचे! सोते में उनके मुंह में घुसाया लंड! फिर उन्होंने जबरदस्ती चाटवाई अपनी चूत!.... आज मैं जो कह…

देवर-भाभी

किचन में शर्त जीतकर फाड़ी चूत! - चटाई वाली भाभी!

Antarvsana : देवर ने दूध वाली चाय पिलाकर जीती शर्त! फिर मीठी गलियों से चुदाई हुई शुरू! किचन ओटे पर बिना कंडोम के फाड़ी भाभी की चूत! और कोख में भर दिया पूरा माल! अभी तक आपने "बाथर…