किचन में शर्त जीतकर फाड़ी चूत! - चटाई वाली भाभी!
Antarvsana : देवर ने दूध वाली चाय पिलाकर जीती शर्त! फिर मीठी गलियों से चुदाई हुई शुरू! किचन ओटे पर बिना कंडोम के फाड़ी भाभी की चूत! और कोख में भर दिया पूरा माल!
अभी तक आपने
"बाथरूम में नंगी भाभी को पिलाया अपना माल!"
में पढ़ा :-
“सविता… चूस… ऐसे ही चूस… ओह्ह… आह… आह… चुसती रह मेरी जान… ओह्ह… ओह्ह…”
थोड़ी ही देर बाद खुद को रोक नहीं पाया। सारा वीर्य मुँह में छोड़ दिया। आखिरी बूँद निकलने तक लंड मुँह में पकड़े रहीं। सारा वीर्य मुँह में इकट्ठा कर रही थीं।
दोनों हाथों से सिर पकड़कर रखा था, ताकि बाहर ना निकाल पाएँ। पर उन्होंने ही जोर से मुँह में जकड़ रखा था। वीर्यपान करना पसंद आ रहा था।
पूरा झड़ जाने के बाद मुँह से निकाला। बड़े कामुक नजर से देखे जा रही थीं। मुँह में सारा वीर्य पकड़ रखा था। अभी गटका नहीं था। इसी वजह से मुँह फूल गया था।
घुटनों पर थीं। नजर मेरी तरफ। होंठ ठीक लंड के सामने।
“सविता, जरा दिखा तो मुझे। तूने क्या अपने मुँह में छिपा रखा है।”
धीरे से मुँह खोलकर दिखाया। एकदम गाढ़ा, ताजा वीर्य मुँह में भरा था। जमकर लस्सी पी हो और वही मुँह में रखकर दिखा रही हों, ऐसा लग रहा था।
“अब किसका इंतजार है तुम्हें सविता। गटक ले मेरा माल और उसके बाद ही मुँह खोलना।”
वैसे ही किया। एक ही बार में सारा वीर्य गटक गईं।
“देख ले अमेय। कुछ बाकी तो नहीं रहा ना?” मुँह खोला। जबान बाहर निकाली और दिखाने लगीं।
नंगी सविता बड़ी कामुक दिखाई दे रही थीं। कुछ नहीं बोला। उठाया और कसकर पकड़े किस करने लगा। वो भी बड़े मजे से किस करने लगीं।
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थोड़ी
देर
दोनों
एक-दूसरे
को
खूब
चूसते
रहे।
हमारे
गाँव
में
सुबह
साढ़े
छह
बजे
सायरन
बजती
है।
किस
लिए
बजती
है,
नहीं
मालूम।
पर
हर
रोज
सुबह
छह
और
रात
साढ़े
आठ
बजे
वो
सायरन
बजती
थी।
एक-दूसरे
को
चूसे
ही
जा
रहे
थे
कि
साढ़े
छह
के
सायरन
से
होश
आया।
नंगे
बाथरूम
में
लगभग
एक
घंटे
से
सेक्स
कर
रहे
थे।
सविता
मेरी
तरफ
देखकर
बस
हँस
रही
थीं।
“अमेय,
चलो
बाहर
अब।
बस
हो
गया
यहाँ।”
अब आगे :-
हाथ
पकड़कर
बाथरूम
के
बाहर
ले
आईं।
“है,
कितना
अच्छे
से
सब
चल
रहा
था।
इस
सायरन
की
तो
ना…”
जोर
से
हँसने
लगीं।
“अरे,
वो
लोग
तो
अपना
काम
कर
रहे
हैं।
उनका
क्या
दोष।
जैसे
अब
देखो,
हम
हमारा
काम
कर
रहे
थे,
वैसे
ही।”
ये
सुनते
ही
दोनों
हँस
पड़े।
“तुम्हें
मालूम
है,
इस
टाइम
पर
हम
लोग
उठकर
चाय
पी
रहे
होते
थे।
इनको
काम
पर
जाने
की
जल्दी
रहती
थी
और
मुझे
भी।
तो
हम
रोज
पाँच
बजे
उठकर
सब
काम
करने
लगते।”
“अच्छा।
तेरा
पति
तो
बीमार
था
ना।
तो
फिर?”
“अरे,
उससे
पहले
की
बात
है
ये।
वो
जब
ठीक
था
तब
काम
पर
जाता
था,
मजदूरी
करने।
और
आते
वक्त
सारे
पैसों
की
दारू
पीके
आता।
और
मुझे
मारता।
तब
की
बातें
हैं
ये।”
🔥 एक और कामुक स्टोरी : सोई हुई सुधा भाभी के मुंह में डाला लंड!
सुनकर
बुरा
लगा।
टॉपिक
बदल
दिया।
“अच्छा।
सविता,
वो
गंदी
यादें
छोड़
दे।
अब
हम
हमारी
नई
यादें
बनाएंगे।
देख,
कैसा
मौसम
ठंडा
पड़
गया
है।
बता,
तुझे
चाय-पानी
है?
गरमा-गरम।”
हँसने
लगीं।
“हाँ-हाँ,
क्यों
नहीं।
पर
अब
तुम
रुको।
मैं
मेरे
हाथ
की
चाय
तुम्हें
पिलाती
हूँ।
मुझे
बताना
कैसे
बनी
है।”
इतना
बोलकर
किचन
की
तरफ
गईं।
नंगी
सविता
को
किचन
में
जाते
पीछे
से
देख
रहा
था।
बड़ी
गांड
इतने
बढ़िया
से
मटक-मटक
के
ऊपर-नीचे
हो
रही
थी
कि
बस
देखता
ही
रह
गया।
“आ
जी।
इधर
आकर
मुझे
सामान
बताओगे
कहाँ-कहाँ
क्या
है।
या
फिर
वहीं
से
घूरते
रहोगे?”
झट
पीछे
गया।
ओटे
के
पास
खड़ी
थीं।
पीछे
से
जाकर
बाँहों
में
लिया।
“हाँ
जान।
तुम
जैसे
बोलो।
बताओ
मुझे
क्या-क्या
चाहिए
तुम्हें।”
“पहले
तो
इस
शैतान
को
जरा
बाजू
कर।”
लंड,
जो
गांड
में
घुसने
की
कोशिश
कर
रहा
था,
हाथ
में
पकड़कर
बाजू
किया।
दोनों
जोर
से
हँसने
लगे।
गैस
पर
मैंने
दिया
हुआ
पतीला
रख
दिया।
चाय
और
शक्कर
के
डिब्बे
दिखाए।
और
स्तन
सहलाने
लगा।
“अमेय,
जरा
रुको
है
अब।
मुझे
चाय
बनाने
दो
ठीक
से।”
आज
कहाँ
सुनने
वाला
था।
“सविता,
तुम
चुपचाप
अपना
काम
करो।
इधर
ध्यान
मत
दो।
मुझे
इन्हें
अभी
तैयार
करना
है।”
“तैयार?
वो
अब
किस
लिए।
क्या-क्या
है
तय।
मेरे
दिमाग
में
मुझे
बताओ
अभी…
चलो।”
“हा
हा।
जब
चाय
तैयार
होगी
ना,
तो
मुझे
तुम्हारा
दूध
चाय
में
डालना
है।”
बस
देखा।
“तुम्हारी
शरारतें
बढ़ती
ही
जा
रही
हैं
हाँ
अमेय।”
स्तन
दबाए
ही
जा
रहा
था।
आगे
कुछ
नहीं
बोलीं।
मजे
लेने
लगीं।
दूध,
चायपत्ती
और
शक्कर
डालकर
चाय
उबाल
दी।
दबाए
ही
जा
रहा
था।
धीरे-धीरे
दूध
की
धार
निकलने
लगी।
दूर
किया।
चाय
उतारनी
थी।
“चलो
अब
दूर
हटो।
वरना
चाय
गिर
जाएगी
शरीर
पर।”
दबाना
छोड़
दिया।
पर
अभी
भी
पीछे
से
बाँहों
में
पकड़
रखा
था।
चाय
कप
में
उतारी
और
मुझे
दी।
दूसरे
कप
में
अपने
लिए
लेकर
बोलीं,
“चलो,
आराम
से
अब
बैठकर
चाय
पीते
हैं।”
रोक
लिया।
“रुको।
तुम
कुछ
तो
भूल
रही
हो।”
कप
आगे
करके
दूध
डालने
के
लिए
कहा।
देखती
ही
रह
गईं।
“अमेय,
कुछ
भी
करते
हो
क्या
तुम।
तुम
ही
ले
लो।
मैं
कुछ
नहीं
करने
वाली।
मुझे
चाय
पीना
है।”
चाय
पीने
गईं।
अपनी
चाय
का
कप
लिया।
चुचियों
पर
लगा
दिया।
एक
हाथ
से
स्तन
दबाने
लगा।
पहले
से
दबाकर
दूध
निकल
रखा
था।
जैसे
ही
एक-दो
बार
दबाया,
दूध
की
धार
चाय
के
कप
में
गिरने
लगी।
बस
अपनी
चाय
पी
रही
थीं।
कुछ
भी
नहीं
बोलीं।
चुचे
दबा-दबाकर
चाय
में
दूध
मिला
लिया।
बाजू
होकर
पहली
घूँट
ली।
वाह…
क्या
चाय
बनी
थी।
“सविता,
ये
तुमने
क्या
बनाया
है?”
“इसीलिए
बोल
रही
थी,
फालतू
का
कुछ
भी
मिक्स
मत
करो।
चली
गई
ना
पूरी
टेस्ट
चाय
की।
सुनो
मत
कुछ
तुम।”
“अरे
पागल,
पहले
सुन
तो
ले।
तुम्हें
मालूम
है,
ऐसी
चाय
मैंने
आज
तक
नहीं
पी
है।
वाह।
जो
इसमें
स्वाद
आया
है
ना,
वो
कभी
भी
किसी
के
हाथ
से
नहीं
आ
सकता।
वाह
सविता
वाह।
तूने
तो
मुझे
आज
अमृत
पिला
दिया।”
शर्म
से
लाल
हो
गई
थीं।
हँसते-हँसते
बोलीं,
“जाओ।
तुम्हारा
तो
कुछ
भी
होता
है।
पागल
कहीं
के।”
चाय
पीके
हो
गई
थी।
घड़ी
देखी
तो
सुबह
के
सात
बज
चुके
थे।
“सविता,
क्या
तुम्हें
याद
है
तुमने
जो
बोला
था।
हमारी
शर्त
लगी
थी।
देखो,
अब
सात
बज
चुके
हैं।
आधा
घंटा
बचा
है।”
नजर
जल्दी
से
दीवार
पर
गई।
उन्होंने
भी
देखा,
सात
बजे
हैं।
मुझे
देखने
लगीं।
“हाँ,
मैं
क्यों
भूलूँगी
भला।
मुझे
सब
याद
है।
और
तुम्हें
भी
याद
होगा।
मैंने
कहा
था
कि
साढ़े
सात
के
बाद
भी
तेरा
खड़ा
हो
गया
और
तू
मुझे
और
एक
बार
चोद
सका,
तो
ही
तू
शर्त
जीतेगा।
वरना
तू
हार
जाएगा।”
“है,
बिल्कुल
याद
है
मुझे।”
“तो
तू
देख
तेरे
नीचे।
तेरा
सिकुड़
गया
है।
और
तुझे
लगता
भी
है
ये
उठने
की
हालत
में
भी
होगा?”
जोर-जोर
से
हँसने
लगीं।
अब
बात
मेरे
सम्मान
की
थी।
किचन
में
ही
थे।
वहीं
घुमाया
और
पीछे
से
स्तन
जोर-जोर
से
दबाने
लगा।
“हाई…
रुको…
बाहर
तो
चलो…
आह…
आह…
जो
भी
करना
हो
कर
लो,
पर
तेरे
शैतान
को
मैंने
सुला
दिया
है।
अब
वो
नहीं
जगने
वाला।”
जोर-जोर
से
हँसने
लगीं।
“सविता,
तू
बस
देखती
जा
और
जो
भी
मैं
करवाऊँ,
वो
करती
जा।”
ओटे
पर
ही
टिकाया
और
स्तन
जोर-जोर
से
दबाने
लगा।
बीच-बीच
में
खुद
मुँह
पीछे
करके
चूमतीं
और
मजे
लेतीं।
हाथ
पकड़ा
और
लंड
पर
रख
दिया।
गिरा
लंड
हाथ
में
पकड़ते
ही
और
हँसने
लगीं।
हिलाने
का
इशारा
किया।
ऊपर
की
चमड़ी
ऊपर-नीचे
करने
लगीं।
किचन
में
सेक्स
करने
की
भी
फैंटेसी
थी।
मालूम
था,
कुछ
भी
करके
लंड
यहीं
खड़ा
कर
सकूँगा।
इसीलिए
हॉल
या
रूम
में
नहीं
ले
गया
था।
जोर-जोर
से
हिला
रही
थीं।
हाथ
स्तन
से
हटाकर
गांड
पर
लाए
और
सहलाने
लगा।
उनके
लिए
ये
अचानक
था।
गांड
सहलाना
अच्छा
लगने
लगा।
हल्के
से
एक
उँगली
गांड
में
डाल
दी।
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जोर
से
चिल्लाईं।
सिसकियाँ
देने
लगीं।
“ओह्ह
अमेय…
वहाँ
नहीं…
अभी
नहीं…
ओह्ह…
अह्ह…
ओह…
उई
माँ…”
सिसकियाँ
सुन
लंड
ने
अचानक
रेंज
पकड़
ली।
थोड़ा-थोड़ा
खड़ा
होने
लगा।
हाथ
लंड
पर
ही
था।
एकदम
चौंक
गईं।
लगा
नहीं
था
कि
इतनी
बार
झड़ने
के
बाद
भी
खड़ा
हो
पाएगा।
अब
उन्होंने
भी
पकड़
बना
ली
और
जोर-जोर
से
हिलाने
लगीं।
चूत
और
गांड
का
छेद
पानी
से
भर
गए
थे।
उँगलियाँ
चिपचिपी
हो
गई
थीं।
वही
उँगलियाँ
मुँह
में
डालीं
और
कसके
चूमने
लगा।
मुँह
से
चाय
की
मिठास
और
चूत
का
नमकीन
स्वाद
और
उत्तेजित
कर
रहा
था।
लंड
अब
एकदम
सख्त
और
मजबूत
बन
गया
था।
ये
Desi
Sex
Ki
Hindi
Sex
Kahani
आप
गरमकहानी
डॉट
कॉम
पर
पढ़
रहे
हैं।
हाथ लंड पर से निकाला और झट झुका दिया। ओटे पर ही झुकाया था। ऊपर से जोरदार झटके देकर चीखें निकालनी थीं। शायद आज के लिए लंड आखिरी बार खड़ा हुआ था।
इसके बाद शाम को ही जान आने वाली थी। आज का आखिरी संभोग ऐसा होना था जैसे जिंदगी का आखिरी हो।
बाल पकड़े। जोर से पीछे खींचे। बस एक जोर की चीख निकली।
“ओह्ह अमेय… अब डाल भी दे… मत तरसा अभी… दे दे चूत में मेरे… और फाड़ दे आज चूत मेरी…”
ऐसे बोलने से और उत्तेजना मिली। लंड गांड को जोर से चुभने लगा। जरा भी देर नहीं की। चूत में पूरा लंड एक ही झटके में घुसा दिया। जोर से चिल्लाईं। मुँह खुला का खुला रह गया। इतनी जोर से चिल्लाईं कि आवाज पूरे घर में गूँजने लगी।
अब छोड़ने वाला नहीं था। जोर-जोर से झटके देना शुरू किया।
“ओह्ह… ओह्ह… और जोर से करो… और जोर से… अह्ह… अह्ह… फाड़ दो आज मेरी चूत… ये तुम्हारी चूत है मेरे जानेमन… इसे जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल करो… और मुझे चोदो मेरे बड़े लंड वाले शेर…”
मदहोश होकर कुछ भी बोले जा रही थीं। अब कुछ नहीं बोलना था। बस जोर-जोर से चोदने में लगा था। पूरे किचन में “टप-टप-टप” की आवाज गूँज रही थी। जाँघें जोर-जोर से गांड पर टकरातीं। हर झटके के साथ जोर से चिल्लातीं।
थोड़ी देर पीछे से चोदने के बाद घुमा लिया। उठाकर ओटे पर बैठाया। मदहोश थीं। पर हँसने लगी थीं। शरीर से टपकता पसीना उन्हें भी उत्तेजित कर रहा था।
“चाहो तो तुम रुक सकते हो। तुम्हारी साँसें फूल गई हैं मुझे चोदते-चोदते अमेय।”
“सविता, अब मैं शर्त जीतकर ही रुकने वाला हूँ।”
दोनों ने घड़ी की तरफ देखा। ठीक साढ़े सात बज चुके थे। लगभग शर्त जीत ही चुका था।
झट चूत में लंड सरकाया। मेरी तरफ देख रही थीं।
“सविता, मैं जीत चुका हूँ… ओह्ह… ओह्ह… अब तू सिर्फ मेरी है… सिर्फ मेरी… आह… आह…”
स्पीड बढ़ा दी।
“अमेय… ओह्ह… ओह्ह… तुम जीत चुके हो मुझे… आह… धीरे-धीरे करो… तुम पूरी तरह से मुझे जीत चुके हो अमेय… अब मुझ पर सिर्फ हक तुम्हारा है…”
आँखों में आँखें डालकर बोल रहे थे। जोर-जोर के झटके दे रहा था।
“सविता, अब तेरी ये चूत, तेरी ये बड़ी गांड, ये बड़े-बड़े चुचे, सब कुछ मेरा है। बोल तू, ये सब कुछ मेरा है।”
“है अमेय। मेरी चूत पर, गांड पर, अब बस तेरा ही अधिकार है।
तू जो चाहे इससे कर। अब मैं कुछ नहीं बोलूँगी। तू इसमें जितना चाहे उतना, जिस वक्त चाहे उस वक्त कुछ भी डाल सकता है। ये दोनों छेद मैंने आज से तुम्हारे नाम किए अमेय।”
“ओह्ह सविता। बस यही तो मुझे सुनना था। आज से तुझे मूतना हो या फिर हगना, वो भी मेरी इजाजत से होगा। समझी मेरी रंडी। मैं जब बोलूँगा और जहाँ बोलूँगा, वही तुझे करना होगा।”
“हाँ अमेय। आज से मैं बस तेरी रंडी हूँ। तू जो बोलेगा वही आज से ये रंडी करेगी। तूने मुझे जीत लिया है। अब इस शरीर का हर एक कोना तेरी इजाजत से चलेगा मेरी जान।”
ऐसे ही कुछ देर गंदी बातें करते-करते चुदाई करते रहे। बहुत जोर-जोर से चुदवा रही थीं। चूत टाइट होने के बावजूद लंड को पीड़ा के साथ अंदर लेने में मजा आ रहा था। रुकने का नाम नहीं ले रही थीं।
पंद्रह-बीस मिनट बाद बोला, “सविता… ओह्ह सविता… मैं अब झड़ने वाला हूँ। क्या तुम मेरा रस अपने अंदर लेने के लिए तैयार हो?”
“हाँ रे मेरे चीते। मुझे बस तेरा रस दे दे। झड़ जा मेरे चूत में।
मुझे और तेरे जैसे शैतान पैदा करने हैं। ताकि और औरतों को तेरे जैसा लंड मिले और वो भी स्वर्गसुख ले सकें। चोद मुझे और जोर से चोद। झड़ जा अपना सारा माल अमेय… ओह्ह… ओह्ह… ओह्ह… आह…”
“हाँ सविता। ओह्ह। मुझे भी तुझे गर्भवती करना है और कम से कम दस बच्चे पैदा करने हैं तेरे पेट से। तुझे इस जन्म में बस मेरी रंडी बनकर रहना है। और मेरे बच्चे पैदा करने हैं सविता।”
“ओह्ह… आह अमेय… तुम जैसे कहोगे वही होगा। तेरे इस लंड के लिए तो मैं अगले सात जन्म तेरी रंडी बनकर रहना पसंद करूँगी। तू बस मुझे चोदना मत छोड़। कर और जोर से साले… और जोर से कर…”
बातें सुनकर कंट्रोल नहीं हो पा रहा था। चूत में झड़ने वाला था। जोर बढ़ा दिया। जोर-जोर से सिसकियाँ मारने लगीं। चुचियों को जोर से दबाकर रखा। नाखून हाथ में गाड़ दिए। जोर का झटका देकर चूत में झड़ गया। सारा माल उतर गया।
आज पहली बार ऐसा हुआ कि सविता के पहले मैं झड़ चुका था। बहुत खुश थीं। मेरी तरफ ही देख रही थीं। लंबा किस किया। घड़ी दिखाई। सुबह के आठ बज के जा चुके थे। घड़ी देखकर मुझे देखने लगीं।
शर्माकर बोलीं, “अरे हाँ बाबा। तुम जीत गए अमेय। आज से तुम मेरे सब कुछ हो और तुम जो बोलोगे वैसा ही मैं करूँगी। ठीक है? हो गई तसल्ली? मैंने सब शर्तें मान ली हैं।”
💋 आपको ये कहानी पसंद आएगी : हाथ बाँधके फाड़ी भाभी की टाइट चुत!
बहुत खुश था। जीत चुका था। उससे भी ज्यादा खुशी इस बात की थी कि अब गांड में लंड घुसा सकता था, जब चाहे और जहाँ चाहे। गांड छोड़ो, पूरा शरीर अब मेरा था। जैसे भी चाहे इस्तेमाल कर सकता था।
“हाँ सविता। अब हुई ना बात। देख लिया मुझसे भिड़ने का अंजाम। अब बस मुझे तेरी गांड मारनी है। और उसे इतना बड़ा करना है कि तू कोई भी चड्डी ना पहन सके।”
पास आकर बोलीं, “हम्म। अब ये गांड तो तुम्हारी हो चुकी है अमेय। तुमने इसे कमाया है। तो तुम इसे जितना चाहे अब मार सकते हो।
जितना चाहे बड़ा कर सकते हो। मैं कुछ नहीं बोलूँगी। और रही बात चड्डी की, तो वो मैं कभी नहीं पहनती। बस मासिक धर्म में मजबूरी में पहननी पड़ती है। वरना मैं वो भी न पहनूँ।” हँसने लगीं।
“ओह्ह सविता। तुझे चोदना तो कितना आसान है। बस साड़ी उठाओ और लंड घुसाओ। मैं सोचकर ही पागल हो रहा हूँ।”
“अमेय, तुम तो झड़ गए। मेरा इंजन गर्म करके खुद ठंडे पड़ गए। अब मेरी तो आग बुझाओ।”
“सविता, अब ये लंड तो उठने से रहा। मैं तेरी चाटता हूँ। रुक।”
चूत में जबान डालकर चूसने लगा। बस दस-पंद्रह मिनट चूसने के बाद कंट्रोल नहीं हुआ और मुँह के अंदर और बाहर झड़ गईं। सारा पानी गटक लिया और उन्हें भी पिलाया। उसके बाद बड़ी देर तक एक-दूसरे को चूमते रहे।
रात भर जगने की वजह से दोनों थक चुके थे। जरा भी आराम नहीं किया था।
“अमेय, क्या हम अब थोड़ी देर के लिए सो जाएँ क्या? फिर थोड़ी देर बाद तुम्हें गरमा-गरम खाना बनाके खिलाती हूँ।”
नींद आ रही थी। “ठीक है सविता। चलो हम आराम करते हैं। दोपहर में आज कुछ तो बाहर से ही ऑर्डर करता हूँ। तू भी कितनी थकी है। आज कुछ मत करना तुम।
आज तो तेरे हाथ और मुँह बस आज एक ही चीज के लिए काम में आने चाहिए।”
शर्मा गईं। “अमेय, तुम भी ना। और कुछ सूझता भी है तुम्हें? पर ठीक है। तुम जैसे बोलो वही होगा अमेय। तुम्हें जब भी मन करे बस मुझे उठा देना। मेरी चूत तुम्हारे लिए हमेशा सजी रहेगी।”
एकदम कहा, “बस चूत?”
“अरे बाबा, सब कुछ। जो भी तुम्हें चाहिए होगा वही होगा। तुम फीलिंग्स पर ध्यान दो ना।”
दोनों हँसने लगे।
बाँहों में लिया और हॉल के बिस्तर पर लेट गए। मेरी बाँहों में थीं। सीने पर सिर रखकर सोई थीं। मुझे भी नींद आने लगी थी।
पर आज जो कुछ हुआ, उस पर विश्वास नहीं हो रहा था। ऐसे सविता का आना। ये सब कुछ हमारे बीच होना। बहुत खुश था। मन ही मन भगवान को शुक्रिया कहा। माथे को चूमा।
गहरी नींद में सो गई थीं। देखकर बहुत अच्छा लगा। अब नींद को रोक नहीं पा रहा था।
आँखें बंद कर लीं। कब लग गईं, पता नहीं चला। मैं भी सो गया।
अगले दो दिन भी दोनों ने बहुत चुदाई की। गांड कैसे मारी, बनाया खाना किस-किस प्रकार से खाया, और कौन-कौन सी मस्तियाँ कीं, ये डिटेल में जानने के लिए जुड़े रहिए।
आपको ये मेरे जीवन में सच में घटित हुआ प्रसंग कैसा लगा, ईमेल पर फीडबैक देकर जरूर बताइए। आगे लिखने के लिए प्रोत्साहित कीजिए। धन्यवाद।
ईमेल -
amymog74@gmail.com
यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। इसमें दिखाए गए पात्र और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं। साइट केवल 18 वर्ष या अधिक आयु के पाठकों के लिए है।
इसी श्रेणी की कहानियाँ
सभी देखेंसोई हुई सुधा भाभी के मुंह में डाला लंड!
Antaravasna Sex : सर दर्द होती भाभी की करी मालिश! नींद में नाइटी के अंदर से दबाए चूचे! सोते में उनके मुंह में घुसाया लंड! फिर उन्होंने जबरदस्ती चाटवाई अपनी चूत!.... आज मैं जो कह…
बाथरूम में नंगी भाभी को पिलाया अपना माल!
Kamvasna Sex Story in Hindi : बाथरूम में नंगी भाभी को मूतते देख देवर ने जबरदस्ती चाटा चूत! फिर Wild तरीके से मुँह में लंड देकर चोदा! और मुंह झाड़ा अपना वीर्य! अभी तक "घोड़ी बनाकर…
घोड़ी बनाकर फिरसे फाड़ी सविता की चूत!
Antarvasna Ki Hindi Sex Stories : सविता को बनाया घोड़ी! बाल खींचकर पीछे से फाड़ी टाइट चूत! Wild Chudai की लगी शर्त! बिना कंडोम कोख में भरा दूसरी बार माल! अभी तक आपने "हाथ बाँधके…