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देवर-भाभी

भाभी के दूध से भीगा लंड!

17 मिनट पढ़ें

Antarvasna : दूध टपकते चुचे चूसे! उँगलियों से झड़वाकर पिया चूत का पानी! फिर दोनों हाथों से हिलाया लंड! भाभी ने गॉक-गॉक मुँह में लिया पूरा लंड! पूरी हुई फेस-फक!

अभी

तक

आपने

"सविता

भाभी

बारिश

में

चुदने

आई! 02"

में

पढ़ा

:-

इतना

कहते

ही

लंड

जोर

से

कसकर

पकड़

लिया।

दर्द

से

थोड़ा

चिल्लाया।

उनके

हाथ

में

पूरा

लंड

बैठ

ही

नहीं

रहा

था,

फिर

भी

दबाती

जा

रही

थीं।

शायद

आगे

मिलने

वाले

दर्द

का

अहसास

अभी

मुझे

दिलाना

चाहती

थीं।

“सविता

धीरे।

क्या

इसे

पकड़कर

झूलने

वाली

हो?

इतना

जोर

से

पकड़

रही

हो।”

बदले

में

स्तन

एकदम

जोर

से

दबाए।

एकदम

झटका

देकर

मुझसे

दूर

आगे

भाग

गईं।

अब

आगे

:-

सविता

थोड़ी

दूर

जाकर

खड़ी

हो

गईं।

साँस

फूल

रही

थी,

लेकिन

चेहरे

पर

डर

नहीं

था।

हँसते

हुए

बोलीं,

“अब

समझ

में

आया

कैसा

होता

है।

अभी

तो

बस

इतना

ही

दबाया

है।

ऐसी

मस्ती

करोगे

तो

चबा

जाऊँगी

पूरा…

बता

रही

हूँ।”

वो

हँसी।

मेरा

लंड

एकदम

टाइट

और

खड़ा

था।

उनकी

नजर

सीधे

उसी

पर

गई।

वो

घूरती

रहीं।

मैं

उन्हें

ऊपर

से

नीचे

तक

ताड़

रहा

था।

जोर-जोर

से

दबाने

की

वजह

से

गाउन

से

दोनों

स्तन

पूरी

तरह

बाहर

आ

गए

थे।

आज

उन

पर

कोई

कपड़ा

नहीं

था।

गोल,

मोटे,

गोरे

स्तन,

उन

पर

बड़ा

काला

घेरा,

और

बीचों-बीच

खड़ी

चुचियाँ।

नजर

हट

ही

नहीं

रही

थी।

जालीदार

गाउन

उनकी

सुंदरता

और

बढ़ा

रहा

था।

मैं

उनके

सामने

पूरा

नंगा

खड़ा

था।

धड़कन

तेज

हो

गई

थी।

इतना

फुर्तीला

और

जोशीला

मर्द

उन्होंने

पहली

बार

ही

देखा

होगा।

वो

मेरा

लंड

छोड़कर

मेरी

आँखों

में

देखने

लगीं।

स्तन

लाल

हो

चुके

थे।

उँगलियों

के

छाप

उन

पर

छप

गए

थे।

चुचियों

से

दूध

टपककर

गाउन

गीला

कर

रहा

था।

लंड

से

भी

चिपचिपा

पानी

निकलकर

शॉर्ट्स

वाली

जगह

तक

आ

चुका

था,

हालाँकि

शॉर्ट्स

तो

उतार

ही

चुका

था।

करीब

आधे

घंटे

से

खड़े-खड़े

स्तन

दबा

रहा

था

और

वो

लंड

सहला

रही

थीं।

वक्त

का

पता

ही

नहीं

चला।

घड़ी

देखी

तो

रात

के

दस

बजकर

पैंतालीस

मिनट

हो

चुके

थे।

इतना

दबाने

के

बाद

लगा

अब

दर्द

हो

रहा

होगा।

तभी

वो

बोलीं,

“हाय

राम।

ये

तो

अभी

से

ही

दुखने

लगे

हैं।

मालूम

है

कल

इन्हें

हाथ

भी

नहीं

लगने

देंगी,

इतना

दुखेगा।”

मैंने

कहा,

“चिंता

मत

कर

सविता।

कल

मालिश

करके

दूँगा।

तू

बस

आज

मुझे

मत

रोक।

जो

करना

है

करने

दे।”

वो

शर्माईं।

“और

कोई

चारा

है

भी

क्या

मेरे

पास?

मैं

पूरी

फँस

गई

हूँ

जाल

में।

अब

तुम

जो

करोगे

वो

सहना

तो

पड़ेगा

ही।

मैं

तो

ठहरी

बेचारी,

सीधी-साधी,

भोली

गाँव

की

लड़की।”

आवाज

में

नखरा

था।

टाँग

खींच

रही

थीं।

“बड़ी

आई

भोली

की

बच्ची।

इधर

आ,

तुझे

दिखाता

हूँ

कौन

भोला

है

और

कौन

बेचारा।”

उन्हें

बाँहों

में

लिया

और

जोर

से

चूमने

लगा।

सविता

भी

खिलखिलाईं

और

मुझे

चूमने

लगीं।

थोड़ी

देर

किस

ऐसे

ही

चला।

फिर

उन्होंने

आँखों

में

देखा।

“अमेय,

सुनो

ना।

क्या

ये

निकलता

हुआ

दूध

पिओगे?

अब

ये

रुकेगा

नहीं

और

पूरा

बर्बाद

हो

जाएगा।”

स्तन

दिखाते

हुए

बोलीं,

“मतलब

तुम्हें

पसंद

तो

है

ना?

तो

ही

पीना,

वरना

रहने

दो।

मेरे

पति

को

दूध

बिल्कुल

पसंद

नहीं

था।

बच्चा

होने

के

बाद

इन्हें

चूसा

ही

नहीं।

बस

दबाता,

और

चूसते

वक्त

दूध

आए

तो

मुझे

ही

पीटता।

तुम

ही

बताओ

मेरी

क्या

गलती

इसमें।”

थोड़ी

मायूस

हो

गईं।

मैंने

कहा,

“देख

सविता,

तू

मायूस

मत

हो।

वो

हरामखोर

तेरे

लायक

ही

नहीं

था।

उसे

क्या

पता

उसने

क्या

खोया

है।

मैं

बहुत

खुशनसीब

हूँ

जो

तू

मुझे

मिली।

तू

आज

मुझे

जहर

भी

दे

तो

मैं

पी

लूँगा।”

ये

सुनते

ही

चेहरे

पर

मुस्कान

आ

गई।

शर्मा

गईं।

अब

उन्होंने

खुद

स्तन

उठाए

और

चुचियाँ

दबाने

लगीं।

दूध

बहने

लगा।

मुझे

थोड़ा

नीचे

होने

का

इशारा

किया,

बाल

पकड़े

और

चुची

मेरे

मुँह

में

दे

दी।

मैं

आराम

से

एक

स्तन

चूसने

लगा,

दूसरे

को

दबाता

रहा।

जैसे

ही

दबाता,

दूध

का

फव्वारा

मुँह

पर

आता।

थोड़ी-थोड़ी

देर

दोनों

स्तन

चूसता

रहा।

खड़े-खड़े

दोनों

थक

गए।

🔥 एक और कामुक स्टोरी : सोई हुई सुधा भाभी के मुंह में डाला लंड!

नीचे

बिस्तर

पहले

से

डला

था।

सविता

को

पकड़ा

और

बिस्तर

पर

लिटा

दिया।

लिटाकर

चुचियाँ

चाटने

लगा।

पहले

गोल

हिस्से

को

जोर

से

दबाता,

फिर

फव्वारा

मुँह

में

लेता

और

चुची

चूसता।

सविता

को

मजा

आ

रहा

था।

“और

जोर

से

चूसो

अमेय…

अह्ह…

ओह्ह…

हाए…

निकाल

दो

मेरा

सारा

दूध

और

पी

जाओ।

खाली

कर

दो

आज

मेरी

छाती

को।

पूरा

दूध

पी

जाओ…

ओह्ह…”

कोशिश

कर

रहा

था

एक

बूँद

भी

नीचे

न

गिरे।

बीच-बीच

में

उन्हें

किस

करता,

चुची

उन्हीं

को

चाटने

देता,

उनके

मुँह

से

उनका

दूध

पिता।

बहुत

देर

तक

स्तन

चूसता

रहा।

होंठ

चाटता

रहा।

पूरी

जीभ

उनके

मुँह

में

डालता

और

सारा

रस

उनके

मुँह

में

देता।

वो

भी

वैसा

ही

करतीं।

थूक

गालों

तक

फैल

गई

थी।

चूमते-चूमते

कान

में

कहा,

“सविता,

अपने

हाथ

में

मेरा

लंड

पकड़ो

ना

और

हिलाओ।

कब

से

वो

तरस

रहा

है।”

अचानक

वो

मेरी

तरफ

देखकर

हँस

पड़ीं।

“अरे,

वो

तो

मेरे

हाथ

में

ही

नहीं

आ

रहा

है,

पागल

लड़के।”

लगा

मुट्ठी

कम

पड़

रही

है।

बोला,

“तो

दोनों

हाथ

से

पकड़ो

ना।

दूसरा

हाथ

खाली

ही

है

तुम्हारा।”

आँखें

खोलीं।

मैं

उनके

ऊपर

चढ़ा

था।

थोड़ा

हटाया

और

बोलीं,

“अरे

पागल,

मैं

वैसे

नहीं

बोल

रही

हूँ।

कब

से

इस

बाएँ

हाथ

से

तुम्हारा

लंड

ढूँढ

रही

हूँ,

मिल

ही

नहीं

रहा।

तुम

इतने

मेरे

ऊपर

चढ़

गए

कि

दायाँ

हाथ

फँस

गया

है।

गर्दन

नीचे

करके

देख

भी

नहीं

पा

रही।”

जोर

से

हँसने

लगीं।

मैं

भी

हँस

पड़ा।

“ओके

बाबा,

मेरी

गलती।

माफ

करो।”

चूमा

और

ऊपर

से

थोड़ा

सरक

गया।

दोनों

एक-दूसरे

की

आँखों

में

देख

रहे

थे।

हलके

से

उनका

बायाँ

हाथ

नीचे

ले

गया

और

गरम

लंड

हाथ

में

थमा

दिया।

“ये

ले।

अब

खुश

ना।”

शर्म

से

लाल

हो

गईं।

मुँह

से

बस

“हाँ”

निकला।

कसकर

पकड़

लिया।

गरम

लंड

सहलाने

लगीं।

टोपे

के

छेद

पर

उँगलियाँ

फेरने

लगीं।

बीच-बीच

में

दबातीं।

बहुत

अच्छा

लग

रहा

था।

लगा

थोड़ी

देर

में

पागल

हो

जाऊँगा।

तभी

अचानक

रुक

गईं।

मजा

आ

रहा

था,

रुकने

से

मैं

उन्हें

देखने

लगा।

उन्होंने

मेरा

हाथ

पकड़ा

और

अपनी

चूत

पर

रख

दिया।

खुद

चूत

सहलाने

लगीं।

इरादा

समझ

गया।

झट

से

गाउन

के

ऊपर

से

चूत

रगड़ना

शुरू

किया।

गरमाहट

कपड़े

के

ऊपर

से

भी

महसूस

हो

रही

थी।

चूत

मुझे

सौंप

दी

और

फिर

से

लंड

पकड़कर

हिलाने

लगीं।

चूत

से

पानी

निकलकर

गाउन

गीला

हो

चुका

था।

एक

उँगली

गाउन

के

ऊपर

से

अंदर

डालने

की

कोशिश

की।

कपड़े

की

वजह

से

पूरा

नहीं

घुस

पाया,

लेकिन

सविता

को

झटका

लगा।

बड़ी

साँस

लीं

और

सिसकियाँ

देने

लगीं।

“ओह्ह…

आह्ह…

ओह्ह…

ओह्ह…”

लंड

पर

पकड़

ढीली

पड़

गई।

मदहोश

हो

गईं।

पूरा

शरीर

सौंप

दिया।

थोड़ी

देर

चूत

के

साथ

खेलता

रहा।

मुँह

से

मम्मे

चूसता,

दूध

पीता,

चूत

मसलता।

पानी

बह

ही

रहा

था।

गाउन

गीला

होकर

हाथ

गीले

कर

रहा

था।

रुक

गया।

उन्हें

देखने

लगा।

बस

आहटें

भर

रही

थीं।

“ओह्ह…

ओह्ह…

आह…

रुक

मत…

करते

जा…

करते

जा…”

पसीने

से

लथपथ

हो

गई

थीं।

साँस

रुकने

का

नाम

नहीं

ले

रही

थी।

मुँह

खुला

था,

लार

टपक

रही

थी।

आँखें

बंद,

माथे

पर

सुख

का

एहसास।

गद्दे

पर

लेटी

चरमसुख

ले

रही

थीं।

धीरे

होश

आने

लगा।

आँखें

खोलीं

और

मेरी

आँखों

में

देखने

लगीं।

एकदम

शर्मा

गईं।

लेकिन

रुकना

नहीं

चाहती

थीं।

फिर

से

लंड

जोर

से

पकड़ा

और

आगे-पीछे

करने

लगीं।

मैं

पागल

हो

रहा

था।

किस

करना

शुरू

किया।

रसभरी

जीभ

मुँह

में

अंदर

तक

डाली।

मैं

भी

लॉलीपॉप

की

तरह

चूसने

लगा।

ये

Desi

Sex

Ki

Hindi

Sex

Kahani

आप

गरमकहानी

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कॉम

पर

पढ़

रहे

हैं।

चूत पर हाथ फिर से गया। इस बार थोड़ा जोर से। सहलाते-सहलाते दिमाग में खयाल आया। सविता ने पैंटी पहनी ही नहीं थी। गाँव की आदत होगी, ब्रा और पैंटी दोनों से दूर।

मन में कहा, वाह, क्या मजा आता होगा इसके पति को। साड़ी ऊपर करो और चूत चुदवाने को तैयार। ऐसी फिगर। मैं तो सुबह-शाम खड़े-खड़े चोदता तुझे। अब मैं ही तुम्हारा पति हूँ।

शायद पति वाली लाइन मुँह से जोर से निकल गई। सविता ने सुन ली।

किस करते-करते रुक गईं और हँसने लगीं। “तुमने अभी क्या बोला, तुम्हें पता भी है?”

“हाँ सविता। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। माफ कर देना, कुछ गलत बोला हो तो।”

“अरे-अरे, माफी किसलिए। मुझे तो वो सुनकर अच्छा लगा। काश मैं तुम्हारी पत्नी होती… काश।”

“सविता, चल मान ले। अगर मैं सच में तेरा पति होता तो?”

वो थोड़ी देर चुप रहीं। फिर आवाज बदल गई, जैसे अंदर की बात बाहर आ रही हो। “अगर तुम मेरे पति होते तो मैं तुमसे सुबह, शाम और रात, तीन-तीन टाइम चुदवाती।

तेरे लंड को आराम तभी, जब तू बाहर काम के लिए जाता। बाकी जब भी तू घर पर होगा, तेरा ये चूहा मेरी छेद में ही रहता। हम सारे घर में चुदाई करते। कभी किचन में, कभी बाथरूम में, तो कभी आँगन में। हाए राम। मैं तो सोचकर भी पागल हुए जा रही हूँ।”

ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी। पीछे हटना भी नहीं था।

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“हाँ सविता, बिल्कुल। और मैं भी तुझे हर रोज ऐसे चोदता कि तेरी चीखें आस-पास वाले सारे पड़ोसियों तक जाएँ। उन्हें भी पता चले कि तू बस मेरी है। कोई ऐरा-गैरा तुझे हाथ भी नहीं लगा सकता।”

“हाँ अमेय। मैं बस तुम्हारी हूँ। मेरी चूत पर अधिकार सिर्फ तुम्हारा है। इस चूत के अंदर एक ही लंड को जाने की अनुमति है अब, और वो सिर्फ तुम्हारा है।”

इतनी बातों से लंड और लंबा, और कड़क हो गया। एक हाथ की बात नहीं रही। उन्होंने दूसरा हाथ भी लगा दिया। दोनों हाथों की पकड़ अच्छी बैठी। जोर-जोर से हिलाने लगीं।

अब नंगा करना था। एक हाथ गाउन के अंदर डाला और पूरा ऊपर किया। सविता ने रोका नहीं। पीछे से उठाने में मदद की। गाउन उतारकर दूर फेंक दिया।

कसकर पकड़ा। बाएँ हाथ से नंगी चूत पर हाथ घिसने लगा। पूरी चूत पर बहुत बाल थे। बालों वाली चूत ही पसंद थी। पानी पहले से आ चुका था। चूत पूरी गीली।

धीरे-धीरे हाथ रखा और बाहरी होंठ फैलाए। फैलाते ही उँगलियाँ चिपचिपे पानी से भर गईं। दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा।

सविता उछलने लगीं। जोर-जोर से सहलाता रहा। मुँह से लगातार आवाजें आने लगीं। रुक ही नहीं रही थीं। मजा ले रही थीं और उसी दौरान लंड भी हिला रही थीं। मेरे मुँह में उनके चुचे थे।

जी भर के दूध पी रहा था। बीच-बीच में दाँतों से काटता, निशान छोड़ता। स्तन लव-बाइट्स से लाल हो चुके थे।

अब तीन उँगलियाँ अंदर थीं। अचानक जाँघों में थरथराहट शुरू हुई। मुँह से जोर-जोर की सिसकियाँ।

“ओह्ह अमेय… और जोर से… फाड़ दे मेरी चूत… निकाल पानी… सारा निकाल… अह्ह… रुकना मत… रुकना मत… अह्ह… ओह्ह… सही कर रहे हो… हाँ वहीं पर… आह्ह…”

एकदम मेरे हाथ पर झड़ गईं। बिस्तर गीला हो गया। हाथ पूरा पानी से भरा। चूत से पानी बह रहा था। आवाज धीमी पड़ गई। माथे से पसीना।

बिस्तर से उठा। वो भी धीरे-धीरे होश में आईं और बैठ गईं। आँखें खोलीं। शर्माते हुए बोलीं, “मुझे माफ कर दो अमेय। मैंने पूरा बिस्तर गीला कर दिया। पर कंट्रोल ही नहीं कर पाई।” थोड़ा मायूस होने का नाटक।

हँस पड़ा। माथे पर चुम्बन दिया।

“अरे सविता, कुछ नहीं होता। मुझे अच्छा लगा तुम मेरे बिस्तर पर झड़ गईं। दुख सिर्फ इस बात का है कि तू बिस्तर पर झड़ गई। मुझे तेरा पानी मेरे मुँह में चाहिए था। अब तू ही देख, मेरा पूरा हाथ भर गया है।”

इतना कहते ही उँगलियाँ अपने मुँह में डाल लीं। पूरा नमकीन स्वाद आया। अमृत से कम नहीं लगा।

सविता रोकना चाहती थीं। हाथ पकड़ा, पर तब तक रस चख चुका था।

“तुम न सच में पागल हो। वो सब मेरा मूत है अमेय। इसे ऐसे पीते नहीं। चलो, थूक के आओ। जब चलो।”

मुँह पर हाथ रखा। “शश्श। ये अमृत है, अमृत। समझी। मुझे इसे और पीना है, और मैं पीऊँगा भी। तुम कुछ नहीं बोलोगी।”

शर्मा रही थीं। प्यार भरी नजरों से देख रही थीं। शायद पहले इतना प्यार मिला नहीं था। थूक हो या पानी, सब अपना लेने की बात वो समझ गई थीं।

नजर लंड पर गई। शान से खड़ा था। हर धमनी फूली हुई। हाथों का अहसास अभी भी था। लंड से चिपचिपा पानी बाहर आ रहा था। सविता के हाथों पर भी लगा था।

मेरी हरकत देखकर वो भी अपना हाथ जीभ से चाटने लगीं। सारा पानी चाट लिया।

अब चूत का स्वाद लेना था। “सविता, मैं तेरी चूत चाटना चाहता हूँ। तू बिस्तर पर लेट जा।”

“ठीक है। ये लो। आज तेरी जबान से भी मुझे चोद दे। डाल दे अंदर जबान तेरी, डाल।”

लेट गईं। पैर फैला दिए। चूत साफ दिख रही थी। होंठ, मूत्रद्वार, योनिद्वार, सब। देर नहीं की। जीभ चूत में डाल दी।

एकदम बड़ी सिसकी लीं। “आह्ह… ओह्ह… आह्ह… मेरी चूत… आह्ह अमेय… चाटो… चाटो और जोर से… प्लीज और अंदर डालो…”

जीभ सारा माल गटक रही थी। स्वाद नमकीन, हल्का मीठा। सारे भाग चाट रहा था। योनि में जीभ डालता-निकालता, जाँघों तक चाटता, फिर चूत में। हर हिस्सा।

अचानक सिसकियाँ बढ़ीं। गर्दन पकड़ी और जोर से चूत की तरफ दबाया। साँस अटक गई। नाक झाँटों पर दब गई। मुँह चूत पर, जीभ अंदर। सिर पकड़कर मुँह चूत से सटा लिया।

समझ पाता, इससे पहले पूरा मुँह पर झाड़ दिया। ज्यादातर पानी मुँह में चला गया, थोड़ा नीचे गिरा। एक ही बार में सारा गटक लिया। नमकीन और मीठा।

सविता देख रही थीं। मैंने भी उनकी तरफ देखा। नजर में अलग चमक थी। तुरंत ऊपर खींचा और किस करने लगीं। मुँह में जो माल था, वो भी चाटने लगीं। लंबा फ्रेंच किस हुआ।

थोड़ी देर बाद बगल हटा। साँस फूल गई थी। पानी की बोतल उठाई और पीने लगा। मुँह खारा हो गया था। सविता बिस्तर पर सिसकियाँ लेती पड़ी थीं। चरमसुख मिल चुका था।

पहली बार किसी औरत की चूत खुली आँखों से देखी थी। पैर फैलाए वैसे ही पड़ी थीं। बालों के बीचों-बीच चूत। काली होने के बावजूद फूल की तरह खिली लग रही थी।

थोड़ा होश आया तो पास आकर लिपट गईं। आँखें बंद। बहुत दिनों बाद इतनी थकी थीं। पानी पिलाने का इशारा किया। थोड़ा पानी पिलाया।

दोनों नंगे एक-दूसरे के सामने बैठे थे। अब दरमियान कोई नहीं था। शर्मा रही थीं। चुचे कड़क। लंड खड़े का खड़ा। नजर हटा नहीं पा रही थीं। बीच-बीच में नजर चुराकर देखतीं, फिर शर्मातीं।

पास आईं। छोटे बच्चे की तरह लिपट गईं। बाँहों में आते ही मोटा लंड दोनों के बीच फँस गया और पेट को चुभने लगा। जोर से हँस पड़ीं।

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कंधे से हाथ निकाला, लंड पकड़कर आड़ा किया, खड़ा किया, और एकदम लिपट गईं। गरमाहट पेट पर महसूस होने लगी। कमर से लंड को पेट पर दबातीं और शर्मातीं।

तीन-चार मिनट बाद बाँहों से दूर किया। स्तन इतने दबाए थे कि धमनियाँ नजर आ रही थीं। जाल-सा पूरे बदन पर। चुचे खड़े। चूत से चिपचिपा पानी टपक रहा था।

आँखें खोलीं। “मुझे भी तुम्हारा लंड चूसना है। दिखाओ मुझे तुम्हारा बड़ा लंड। मुझे भी उसका पानी पीना है। मेरी प्यास बुझा दो अमेय।”

हथियार तैयार ही था। उसी से चिपकी बैठी थीं। सविता उठ खड़ी हुईं। मैं भी उठा। होंठों पर किस करने लगीं और हाथ से लंड हिलाने लगीं।

किस करते-करते नीचे जाने लगीं। बदन पर आकर मेरे चुचों को भी चूसने लगीं। पसंद आ रहा था। मैं भी उनके स्तन दबाकर दूध निकाल रहा था। दूध शरीर पर गिरकर सीधे लंड पर जा रहा था।

नीचे गईं। एक हाथ से लंड पकड़े ही रखा था। लाठी की तरह सख्त हो चुका था। मेरी तरफ देखकर बोलीं, “क्या तुम तैयार हो अमेय, स्वर्गसुख पाने के लिए? तुम अब दूसरी दुनिया में जाने वाले हो। तुम्हें लगेगा बस किसी और ही धरती पर हो।”

“है सविता। मुझे करवा सैर स्वर्ग की।” आँखें बंद कर लीं।

इतना सुनते ही लंड मुँह में ले लिया।

आज तक सुना था स्वर्ग धरती पर है। आज देख भी लिया। अगर उस वक्त बोलतीं सारी प्रॉपर्टी दे दो, नाम कर देता, बस इतना कहता कि रुकना मत। चूसती रहो।

आगे-पीछे होते वक्त बाल उड़ रहे थे। मुँह के हर भाग का एहसास हो रहा था। लंड अंदर जाता तो जीभ टोपे पर घुमातीं। बहुत देर तक। आधा ही ले पा रही थीं। बाकी मोटाई की वजह से मुँह में जा नहीं रहा था।

अब चार्ज लेना था। “सविता, अब तू हाथ छोड़। मैं करवाता हूँ, जैसा करना है।”

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गर्दन पकड़ी और फेस-फक करने लगा। जोर-जोर से लंड मुँह में अंदर-बाहर। कमरे में गॉक-गॉक की आवाज। थूक लंड से होती हुई नीचे गिर रही थी।

“सविता, मेरा लंड पूरा खा ले ना। तेरी बरसों की भूख मिट सकती है। ये ले, पूरा अंदर ले। एक इंच भी बाहर मत छोड़। तेरी जीभ मेरी गोटों को लगनी चाहिए। देख ले कितना अंदर लेना है।”

लंड मुँह से बाहर निकाला। थूक छाती पर गिरी, वहाँ से चूत की तरफ बहने लगी। मेरी तरफ देखकर हँसने लगीं। साँस फूल गई थी।

झट नीचे गया, होंठ चूमे, सारी थूक चाट ली, जोर-जोर से किस करने लगा। दोनों घुटनों पर थे। लंड पेट को चुभ रहा था। हाथ लेकर लंड थमा दिया। फिर से हिलाने लगीं।

बीच-बीच में लंड अपनी चूत पर घिस रही थीं। बालों की वजह से गुदगुदी होती, हर बार हँस पड़ता।

इस बार भी वैसा ही किया। उन्हें लगा मैं उन पर हँस रहा हूँ। अचानक लंड के बाल जोर से खींच लिए।

“सविता, पागल है क्या तू? अरे अह्ह…”

वो जोर से हँसने लगीं। मैं भी चुप नहीं बैठा। सिर के बाल जोर से खींचे।

“उई माँ…” चीख निकली। मुँह से और कुछ निकलने से पहले किस कर दिया। जीभ चूसने लगा। वो भी चूसने लगीं। बहुत देर तक एक-दूसरे की जीभ चूसते रहे।

आगे की कहानी :

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टॉवल से बाँधकर गले तक डाला लंड!

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यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। इसमें दिखाए गए पात्र और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं। साइट केवल 18 वर्ष या अधिक आयु के पाठकों के लिए है।

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