चाची की चूत से जिगोलो बनने का सफर!
Antarvasna Hindi Sex Stories : रूपा चाची को अंडरवियर गिफ्ट देकर किया नंगी! रात भर मारी चूत व गांड! फिर चाची की प्यासी सिलाई कस्टमरों को पेल बन गया जिगोलो!
हेलो दोस्तों, मेरा नाम विकास है। मैं बनारस का रहने वाला हूँ। आज जो कहानी आपसे शेयर करने जा रहा हूँ, वो मेरे और मेरी चाची के बीच की है। उसी रात के बाद मेरी जिंदगी पलट गई।
आज मैं जिगोलो भी हूँ और लेडीज बॉडी मसाज का काम भी करता हूँ। यह मेरी पहली कहानी है। लिखते समय कोई छोटी-बड़ी गलती रह जाए तो माफ कर देना - इस गरमकहानी डॉट कॉम साइट पर नया हूँ।
मेरा परिवार बड़ा है, पंद्रह-बीस लोग। चाची का नाम रूपा है। उम्र अड़तालीस के आसपास, दिखती बत्तीस-पैंतीस की हैं। हाइट पाँच फुट से ऊपर। तीन बच्चे - एक तीस का, बाकी सत्ताईस और तेईस के आसपास।
चाचा के दिल में छोटा छेद है, मेहनत का काम नहीं कर सकते। सेक्स में भी वो चाची को संतुष्ट नहीं कर पाते। चाची मध्यम वर्ग से हैं, घर का खर्च चलाने के लिए सिलाई करती हैं।
ब्रांडेड चीजों का शौक उनकी कमजोरी है - और उसी कमजोरी ने दरवाजा खोला।
फिगर 38-36-40। गाँव का जवान हो या बुड्ढा, उन्हें देखकर लंड खड़ा हो जाए। गर्म जिस्म, भारी चूचे, मोटी गांड।
बात छह महीने पहले की है। पहले मैं काम के लिए बाहर रहता था, अब घर से आता-जाता हूँ। चाची अक्सर हमारे घर आती रहती हैं - खुले विचार, खुशमिजाज।
एक दिन घर पर कोई नहीं था। मैंने अपने लिए ब्रांडेड वेस्ट और फ्रेंच अंडरवियर मंगवाया था। कमरे में ट्राई कर रहा था, सिर्फ उसी अंडरवियर में। लंड थोड़ा बाहर खिसका हुआ था।
तभी चाची बिना खटखटाए अंदर आ गईं। तिरछी निगाह लंड पर टिक गई। शर्म से मैंने झटपट पैंट खींच ली।
चाची मुस्कुराईं। “यार विकास, मेरे लिए भी कुछ ले आना… जैसे तू अपने लिए लाता है।”
बात अजीब लगी, लेकिन मैंने हाँ कर दी। लगा वो खुल रही हैं। ये Chachi Bhatije की Antarvasna Hindi Sex Kahani आप
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कुछ दिन बाद मार्केट गया तो उनकी बात याद आई। सबसे अच्छा अंडरगारमेंट पैक करवा लिया। घर आकर कहा, “चाची, आज रात आपको गिफ्ट दूँगा।”
वो खुश हो गईं। गले लगाया। जाते-जाते एक लिप किस दे गईं। होंठों की गर्माहट देर तक रही।
रात को वो चुपचाप मेरे कमरे में आईं। “मेरा गिफ्ट कहाँ है?”
मैंने कहा, “पहनाकर दिखाना होगा चाची… नहीं तो पता कैसे चलेगा फिट है या नहीं।”
चेहरा लाल हुआ। फिर कातिलाना मुस्कान आई। “ठीक है।”
वो गांड मटकाती अपने घर गईं। बाथरूम से आवाज आई, “फ्रेश होकर बुलाती हूँ। तब कमरे में आना।”
थोड़ी देर बाद बुलावा आया। कमरे में अंधेरा था। लाइट जलाई तो आँखों पर यकीन नहीं हुआ।
चाची मेरे सामने एकदम नंगी खड़ी थीं। 38 के गोरे-भारी चूचे लटक रहे थे, निप्पल काले और तने। कमर भरी हुई। 40 की गांड इतनी गोल कि हाथ अपने आप बढ़ जाए। चूत पर हल्के बाल, जांघें मोटी और मुलायम।
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“देखो… बताओ, कैसी लग रही हूँ?” उनकी आवाज में शर्म से ज्यादा चुनौती थी।
“चाची… आप तो एकदम सेक्सी माल लग रही हो। इतनी नंगी खड़ी हो और पूछ रही हो कैसी लग रही हूँ?”
वो हँसीं। “बस देखते रहोगे… या कुछ करोगे भी?”
समझने में देर नहीं लगी। मैं उन पर टूट पड़ा। बिस्तर पर लिटाया। होंठ चूसे, गर्दन चाटी, चूचों को मुँह में भर लिया। एक निप्पल दाँतों से दबाया तो उनकी कमर उछली।
“आह्ह्ह… विकास… धीरे… अह्ह्ह… चूस ले… सालों से किसी ने ऐसे नहीं चूसा…”
मैं दोनों चूचे मसलता, चाटता नीचे गया। नाभि पर जुआ, जांघों के अंदर किस। फिर चूत के पास पहुँचा। गंध से लंड और तन गया। जीभ फाँकों पर फेरी, क्लिट चूसी, अंदर तक घुसाई। चाची बिना पानी की मछली की तरह छटपटाने लगीं।
“आह्ह्ह… अब और मत तड़पा… पेल दे… चूत में डाल… अह्ह्ह विकास… मर गई…”
उंगलियाँ अंदर कीं, गीली दीवारें चूस रही थीं। “चाची की चूत तो झरना बन गई है। चाचा देते नहीं होंगे तभी इतनी प्यासी हो।”
“चुप कर… अह्ह्ह… डाल न… तड़पा मत…”
मैंने लंड चूत के मुँह पर रखा। एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक साथ अंदर घुस गया। चाची की चीख निकली — इतनी तेज कि घर में कोई होता तो भागता हुआ आता।
“आह्हhhhh… निकाल… बहुत मोटा है… दर्द… अह्ह्ह विकास रुक…”
लेकिन उस वक्त चूत चोदने का भूत सवार था। मैंने एक बात नहीं सुनी। कमर पकड़कर ताबड़तोड़ पेलने लगा। चाची पहले रो-रो कर कराह रही थीं, नाखून पीठ में गाड़ रही थीं।
“आह्ह्ह… हरामी… फाड़ दिया… धीरे कर… अह्ह्ह… नहीं… जोर से ही कर… मादरचोद…” ये XXX Sex Stories Hindi With Nonveg Hot Sex Story के साथ आप
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दस-बारह धक्कों बाद दर्द मजे में बदलने लगा। चाची खुद कमर उचकाने लगीं। गांड मेरी जांघों से पट-पट टकरा रही थी। चप-चप की आवाज कमरे में गूँज रही थी।
“वाह विकास… आज तूने जन्नत दिखा दी… अह्ह्ह… और जोर से पेल… बड़ी मजा आ रहा है… तेरा गधे का लंड है क्या… आह्ह्ह…”
उनके रस से मेरा लंड और फिसल रहा था। मैंने टांगें कंधों पर चढ़ा लीं। और गहराई तक जाने लगा। चाची की आँखें उलटने लगीं।
“आह्हhhhh… आ गया… झड़ गई… मादरचोद और पेल… चूत फाड़ दे…”
वो जोर से झड़ गईं और सुस्त बिस्तर पर फैल गईं। मेरा बारूद अभी निकला नहीं था। मैं उसी पोजीशन में गचागच पेलता रहा।
“तेरा लंड अभी गिरा नहीं… क्या खाता है तू?” चाची हाँफते हुए बोलीं।
“चाची, कितने साल से आपकी चूत के पीछे पड़ा था। आज मौका मिला है तो जमकर पेलूँगा।”
“ठीक है… आज मन की इच्छा पूरी कर ले… अह्ह्ह… लेकिन अंदर ही छोड़ना… बारूद की गर्मी महसूस करनी है…”
दस मिनट और चोदने के बाद कमर अकड़ गई। दो-तीन ताकतवर झटके मारे और पूरा माल उनकी चूत में उड़ेल दिया। चाची ने लंड को अंदर ही कस लिया।
“उफ्फ्फ… कितना गरम भरा… अह्ह्ह विकास…”
मैं उनके बगल में लेट गया। हाथ अभी भी उनके चूचों और गीली चूत पर घूम रहा था। थोड़ी देर बाद चाची नंगी ही किचन गईं। बादाम वाला दूध लेकर आईं।
“पी ले। अभी तो पूरी रात तेरे साथ चूत और गांड दोनों करवानी हैं। सो मत जाना।”
मैं हँसा। “क्यों नहीं मेरी जान। आपकी सेवा के लिए तो हमेशा तैयार हूँ।”
उन्होंने दूध पिलाते-पिलाते लंड सहलाना शुरू कर दिया। मुँह में लिया, थूक से चिकना किया। लंड फिर तन गया। चाची मुस्कुराईं।
“खड़ा हो गया साले का… अब गांड भी देनी पड़ेगी क्या?”
“पहले चूत एक बार और… फिर गांड।”
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वो मेरे ऊपर चढ़ गईं। चूत में लंड बैठाकर कुदने लगीं। भारी गांड मेरे पेट पर बैठ-बैठ कर लहरा रही थी। चूचे मेरे मुँह पर दब गए।
“पी ले इन्हें… आह्ह्ह… अपनी चाची को रंडी बना… जोर से… मादरचोद विकास… चूत तेरी हो गई…”
उस रात हम रुकने वाले नहीं थे। घड़ी की सुई तीन की तरफ बढ़ रही थी और बिस्तर अभी भी हिल रहा था।
चाची मेरे लंड पर बैठकर कुद रही थीं। हर बार नीचे गिरते ही चूत जड़ तक निगल लेती। मैं दोनों चूचे मुँह में भर-भर कर चूस रहा था। उनकी मोटी गांड मेरे पेट पर पट-पट बैठ रही थी।
“आह्ह्ह… विकास… और ऊपर उठ… चूत फाड़… अह्ह्ह मादरचोद… चाची को रंडी बना दे…” ये Family Incest Sex Story आप
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मैंने उनकी कमर पकड़कर नीचे से धक्के दिए। तीसरा राउंड था। चाची की चूत पहले से ढीली और फिसलन भरी थी, मेरा पहला माल अभी भी अंदर घुल रहा था। वो खुद बाल बिखेरे, मुँह खुला, गाली दे रही थीं।
“तेरा लंड चाचा से दोगुना है… सालों से भूखी थी… अह्ह्ह… आज पेट भर के चुद रही हूँ… जोर से मार…”
मैंने उन्हें उल्टा किया। घोड़ी बना दी। गांड मेरे सामने उठी - 40 इंच की, गोल, लाल थप्पड़ों से। मैंने जोर का थप्पड़ मारा। आवाज कड़की। चाची मजे से कराह उठीं।
“मार… गांड पर मार… हरामी… अह्ह्ह…”
लंड फिर चूत में घुसा। इस बार पीछे से इतना जोर कि बिस्तर खटिया की तरह बोला। चाची तकिया मुँह में दबाए सह रही थीं, फिर तकिया फेंक दिया।
“आवाज आने दे… कोई नहीं है… चोद… अपनी चाची की बुर चोद… आह्हhhhh…”
चौथा राउंड गांड का माँगा हुआ था, लेकिन मैंने पहले चूत में ही दूसरा माल छोड़ दिया। चाची झड़कर ढेर हो गईं। घड़ी में तीन बज रहे थे। दोनों पसीने से तरबतर। नींद कब आई, पता नहीं चला।
सुबह आँख खुली तो कंबल के नीचे गरमाहट थी। चाची मेरे पेट पर झुकी थीं। 7 इंच नहीं, उनका मुँह मेरे लंड पर था। आँखें मुझ पर टिकी थीं, मुस्कुराहट के साथ चूस रही थीं। लार बह रही थी। एक हाथ अंडों पर।
“चाची… सुबह-सुबह…”
उन्होंने लंड मुँह से निकाला, धागा सा लार टूटा। “सुबह का लंड मीठा लगता है। खड़ा कर रही हूँ… फिर से पेलना है।”
मैंने उनके बाल पकड़े। वो गले तक लेने लगीं। कभी-कभी खाँसतीं, फिर वापस ले लेतीं।
“आह्ह्ह चाची… ऐसे चूसो… रंडी जैसी… हाँ… पूरा निगल…”
लंड तनते ही वो चारपाई पर पेट के बल लेट गईं। गांड ऊपर उठाई, दोनों हाथों से फाँकें खोल दीं। चूत और गांड का छेद दोनों दिख रहे थे। कल रात का सूखा माल जांघों पर चिपका था।
“अब डाल… जहाँ मन करे। मैं पूरी की पूरी तेरी हूँ। जब चाहे चूत मार, जब चाहे गांड।”
मैंने पहले चूत में डाला। सुबह की टाइट गर्माहट में पाँच-सात धक्के लगाए। फिर लंड निकालकर गांड के छेद पर रखा। चाची का शरीर तन गया।
“आह्ह्ह… वहाँ… धीरे विकास… पहली बार है गांड में… अह्ह्ह…”
थूक लगाया। नोक अंदर गई। चाची ने तकिया काटा। आधा, फिर धीरे-धीरे पूरा। मैं रुका। उनकी पीठ सहलाई। फिर बहुत धीमे चलाया।
“अंदर है… पूरा… अह्ह्ह… निकाल मत… आदत पड़ने दे… मादरचोद गांड फाड़ रहा है… लेकिन मजा… आ रहा है…”
दस मिनट गांड में पेलने के बाद दोनों साथ झड़े। मैंने माल उनकी गांड में ही छोड़ा। निकलते समय सफेद बाहर आया। चाची हाँफती हुई बोलीं, “अब यह गांड भी तेरी हो गई… जब चाहे ले लेना…”
तभी दरवाजे पर खटखटाहट हुई। दोनों में जान आ गई। कपड़े समेटे, बिस्तर ठीक किया। चाची ने साड़ी सँभाली, मैंने पैंट खींची।
दरवाजा खोला तो बाहर बगल वाली औरत खड़ी थी - चाची से उम्र में बड़ी, लेकिन सेक्सी, चाची की सहेली और सिलाई की ग्राहक। उसकी निगाह कमरे के अंदर मुझ पर गई। मुस्कुराई। जानती-सी मुस्कुान थी।
दोनों दालान में धीमी आवाज में बात करने लगीं। ब्लाउज का नाप, कपड़े का रंग। सहेली जाते-जाते एक बार फिर मुड़ी और मुझे देखकर आँख मारी।
दरवाजा बंद होते ही मैंने चाची की कमर पकड़ी। “क्या बात हो रही थी?”
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“ब्लाउज का नाप देने आई थी।”
मैंने मजाक में कहा, “चाची, अपनी इस दोस्त की चूत भी दिलवा दोगी क्या? बड़ी सेक्सी लग रही थी।”
चाची ने थप्पड़ जैसा हाथ छाती पर मारा, लेकिन हँसी। “बदमाश। एक से मन नहीं भरा क्या तेरा? रात भर मेरी चूत-गांड कुचली, सुबह गांड मारी, अब सहेली चाहिए?”
“चाची, नई बुर का स्वाद अलग होता है। मजा लेना चाहिए ना।” ये Gigole Sex Story in Hindi आप
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वो कुछ देर देखती रहीं। फिर धीरे बोलीं, “ठीक है। मैं इंतजाम करती हूँ तेरा। लेकिन पहले मेरी सेवा ठीक से चलती रहे। कमी रखी तो बंद।”
हफ्तों बाद वो इंतजाम हुआ। सहेली अकेली आई, नाप के बहाने। चाची ने दरवाजा अंदर से लगाया और मुझे इशारा किया।
उस दिन पहली बार चाची के अलावा किसी और की चूत मिली - उम्र में बड़ी, अनुभवी, भूखी। चाची बाहर बैठकर सिलाई करती रहीं जैसे कुछ हो ही न रहा हो।
कमरे में सहेली के मुँह से वही गाली और कराहें आ रही थीं जो कल चाची के मुँह से निकली थीं।
उसके बाद भूख बढ़ती गई। एक दिन मैंने साफ कह दिया, “चाची, आपकी जितनी लेडीज कस्टमर हैं… उनमें से जो प्यासी हों… गुप्त तरीके से मिलवा दो।”
चाची पहले नाराज हुईं। फिर सोचा - ब्रांडेड चीजें, पैसे, और मेरा लंड उनके हाथ में रहे। बोलीं, “ठीक है। मैं मना लूँगी। लेकिन नाम नहीं चलेगा। सिलाई घर का काम है, यह रात का।”
धीरे-धीरे उनके आधे से ज्यादा कस्टमर मेरे पास आने लगे। कोई मालिश के बहाने, कोई ब्लाउज के नाप के बहाने, कोई सिर्फ दरवाजा बंद करके। कोई चालीस की, कोई पैंतीस की, कोई साठ के करीब।
सबकी भूख अलग, सबकी चूत का स्वाद अलग। चाची हिसाब रखतीं। कभी-कभी खुद भी शामिल हो जातीं - दो औरतें, एक लंड।
इसी सिलसिले ने मुझे जिगोलो बना दिया। अब सिर्फ चाची की सहेलियाँ नहीं। मसाज की सर्विस भी चलती है। जो औरतें आईं, संतुष्ट होकर अपनी सहेलियों को रेफर करती हैं। बनारस में मुँह-जुबानी बात चलती है, नाम नहीं।
चाची आज भी जब मौका मिलता है बुला लेती हैं। कभी चूत, कभी गांड, कभी सिर्फ मुँह। उनके जिस्म पर अब मेरा हक पहले जैसा ही है। चाचा घर में होते हैं तो हम चुप रहते हैं। नहीं होते तो पुरानी वाली रात दोहरा देते हैं।
जल्द ही वो कहानी भी लिखूँगा जिसमें मैंने चाची की गांड पहली बार मारी थी - उस सुबह वाले राउंड का पूरा ब्योरा, और सहेली वाली दोपहर।
दोस्तों, यह मेरी रियल कहानी है। चाची की कमजोरी ब्रांडेड कपड़े थे। मेरी कमजोरी उनकी 40 की गांड। दोनों मिल गए तो जिंदगी का धंधा निकल आया।
अगर किसी को कहानी अच्छी लगी हो या आगे की बाते हो तो मेल कर लेना।
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यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। इसमें दिखाए गए पात्र और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं। साइट केवल 18 वर्ष या अधिक आयु के पाठकों के लिए है।
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